आज कल मैं पटना की सड़कों की गर्द छान रहा हूं.. कह सकते हैं की मैं अभी चिट्ठाजगत से अवकाश ले रखा हूं, पर मैं जल्द ही वापस लौटूंगा और मेरे पास कहने को कई बाते होंगी.. तब-तक के लिये अलविदा..
Tuesday, March 11, 2008
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हर किसी की अपनी दुनिया होती है जिसमें वह हर खुशी तलाश करता है. मेरी दुनिया भी कुछ ऐसे ही तत्वों से बनी है...
आज कल मैं पटना की सड़कों की गर्द छान रहा हूं.. कह सकते हैं की मैं अभी चिट्ठाजगत से अवकाश ले रखा हूं, पर मैं जल्द ही वापस लौटूंगा और मेरे पास कहने को कई बाते होंगी.. तब-तक के लिये अलविदा..
द्वारा PD at 10:53:00 PM
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मैं पागल हूं, क्योंकि मैं सोचता हूं.. मैं पागल हूं, क्योंकि मैं पूरे समाज को, एक चश्में से देखने की कोशिश करता हूं.. मैं पागल हूं, क्योंकि मैं अंग्रेजी को, अपना सब कुछ मानने वाले समाज में, भी हिंदी बोलना चाहता हूं.. मैं पागल हूं, क्योंकि मैं अपना समय बरबाद होने की चिंता छोड़कर, दूसरों की मदद करना चाहता हूं.. मैं पागल हूं, क्योंकि मैं महाराष्ट्र या गुजरात नहीं, बिहार जाना चाहता हूं.. मैं पागल हूं, क्योंकि मैं किसी जलसे में, किसी के कपड़े फाड़ने के पक्ष में नहीं हूं.. मैं पागल हूं, क्योंकि ऐसे लोगों को दुनिया, पागल ही कहती है.. और मैं खुश हूं, क्योंकि मैं पागल हूं.. वैसे नाम प्रशान्त प्रियदर्शी है..
आप मुझसे इस पते पर मेल कर सकते हैं - prashant7aug@gmail.com
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