Showing posts with label ब्लौगवाणी. Show all posts
Showing posts with label ब्लौगवाणी. Show all posts

Tuesday, September 29, 2009

ब्लौगवाणी के बाद हिंदी चिट्ठाकारिता की दिशा क्या हो सकती थी?

अभी-अभी नेट पर बैठा.. हर दिन की तरह दिन की शुरूवात ब्लौगवाणी से नहीं की.. सोचा कि वह तो बंद हो चुकी है.. मगर जैसे ही अपने ब्लौग पर गया तो पाया कि ब्लौगवाणी के विजेट पर कल के मैसेज के बदले ब्लौगवाणी का लोगो दिख रहा है.. देखकर मन प्रसन्न हो गया.. ब्लौगवाणी का मैसेज भी पढ़ा जिसका लिंक यहां है.. ब्लौगवाणी के नये अवतार के बारे में जानकर और भी अच्छा लगा.. अब उसका इंतजार है..

मैं बैठा सोच रहा था कि अगर ब्लौगवाणी सच में नहीं आती तो हिंदी ब्लौगिंग का ऊंट किस करवट बैठता?

सबसे पहले तो मैं अपने इस ब्लौग की बात कर लूं.. मेरे इस ब्लौग पर लगभग 64000 हिट्स हुये हैं.. जिसमें से लगभग आधे ब्लौगवाणी की ओर से आये हैं.. मुझे अपने शुरूवाती दिनों की भी याद है जब 80 फीसदी ट्रैफिक ब्लौगवाणी देता था.. जैसे-जैसे समय बीतता गया और मेरा गूगल पेग रैंकिंग ऊपर चढ़ता गया, वैसे-वैसे ब्लौगवाणी की भागीदारी कम होती गई.. जो अब कुल 50 फीसदी पर आ गई है.. मतलब आजकल मुझे हर पोस्ट पर ब्लौगवाणी से लगभग 20 से 30 फीसदी ही ट्रैफिक मिलती है, लगभग 10 फीसदी चिट्ठाजगत से, लगभग 50 फीसदी गूगल से और बाकी के श्रोत अन्य हैं..

मतलब कुल मिला कर मैं यह कह सकता हूं कि मुझे अब ब्लौगवाणी के चले जाने से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता.. मगर ऐसे में इसके बंद होने से मुझे बहुत बुरा लगा.. हम जब छोटे होते हैं और माता-पिता पर निर्भर रहते हैं, वहीं बड़े होने के बाद और स्वनिर्भर होने के बाद क्या उन्हें छोड़ देते हैं? कुछ-कुछ मेरे ब्लौग के लिये ब्लौगवाणी का महत्व भी ऐसा ही कुछ है.. किसी अभिभावक की तरह..

मेरी राय में ब्लौगवाणी के बंद होने से उन ब्लौगरों के ट्रफिक पर बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता जिनका गूगल पेज रैंक 3/10 या उससे ज्यादा है.. मगर नये ब्लौगरों को जो क्षति पहूंचती वह बयान नहीं किया जा सकता है.. मैंने यह भी देखा है कि नये ब्लौगरों को ही ब्लौगवाणी से अधिक शिकायत होती है.. कि उनके ब्लौग को कोई पसंद नहीं करता या फिर कोई पढ़ता नहीं या फिर कोई कमेंट नहीं करता.. तो यह बात साफ कर देनी चाहिये कि जब वे लगातार अच्छा लिखते रहेंगे तब जाकर 1-2 साल में वे उस स्थिति में पहूंच सकेंगे जहां वे कई ब्लौगरों को देखते हैं.. सिर्फ 3-4 ट्रैफिक खीचने वाले शीर्षक देकर नहीं.. कुछ लोग हैं जो इसके अपवाद हैं और कम समय में ही अपनी पहचान बना लिये हैं..

मैं सभी को यही सलाह देना चाहूंगा कि वे पसंद, ब्लौगवाणी द्वारा आने वाले ट्रैफिक्स और चिट्ठाजगत के रैंक के फेर में ना पड़कर गूगल रैंकिंग और अलेक्सा रैंकिंग के फेर में पड़ें.. तभी वे लंबी दौर में बने रह सकते हैं.. इसी में हिंदी चिट्ठाकारिता की भी भलाई है..

अगर आपके पास भी इस विषय पर कहने को कुछ है तो अपना विचार रखना ना भूलें.. धन्यवाद

Monday, August 04, 2008

नये ब्लौगवाणी की कुछ खामियां

आज बहुत दिनों बाद ऑफिस में कुछ फुरसत से बैठा तो मैंने ब्लौगवाणी के नये संस्करण के साथ छेड़-छाड़ शुरू कर दी.. मैंने पाया की इसे बहुत ही अच्छे तरीके से डिजाईन किया गया है मगर साथ ही इसमें अभी भी कुछ खामियां हैं.. उदाहरण के तौर पर आप ये तस्वीर देखिये..



इसमें लाल रंग के घेरे में आपको मेरी तस्वीर दिखाई देगी मगर सारे ब्लौग पोस्ट बाल किशन जी के दिख रहे हैं.. दर असल आज सबसे पहले मैंने बाल किशन जी के पुराने पोस्टों को ब्लौगवाणी की सहायता से खोला था और फिर अपने पुराने पोस्टों को देखने की इच्छा भी हुई.. शायद मेरे पुराने पोस्टों की जगह ये मेरे कंप्यूटर के कुकी से बालकिशन जी के पोस्टों को निकाल कर दिखा रहा है..

एक और खामी मुझे नये ब्लौगवाणी में नजर आयी, वो यह की एक ही आई.पी. पते से आपको यह दो-दो बार आपको "अपनी पसंद" चुनने का मौका दे रहा है.. एक बार तो मुख्य पृष्ठ से और दुसरी बार आप उस लेखक के पुराने पृष्टों से.. आप पुराने पृष्टों पर जायें और उपर दिये गये चित्र में हरे रंग से घेरे हुये गोले वाले जगह पर क्लिक कर दें.. बस ये दो दो बार पसंद की श्रेणी में आ जायेगा..

अभी तक मुझे ये दो खामी दिखी है नये ब्लौगवाणी में.. उम्मीद करता हूं की मैथिली जी या सिरिल जी जल्द ही इसका कोई उपाय निकालेंगे.. मेरे पास उनका कोई ई-पता नहीं है, नहीं तो पोस्ट करने के बदले मैं उन्हें सीधे मेल कर देता..

एक आग्रह भी करना है उनसे.. मैंने पिछले सप्ताह एक नया चिट्ठा शुरू किया है जिसे अभी तक ब्लौगवाणी पर जगह नहीं मिली है.. कृप्या इसे भी ब्लौगवाणी में जगह दें जिससे ये अधिक से अधिक लोगों तक पहूंच सके.. उस चिट्ठे का नाम है : हम बड़े नहीं होंगे, कॉमिक्‍स-जिंदाबाद

धन्यवाद