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Wednesday, December 10, 2008

तेरी भाभी ने मुझे सॉरी बोला

"क्या कर रहा है भाई?" दोपहर के खाने के बाद मैंने सेमटाईम पर पिंग करते हुये पूछा.. सेमटाईम हमारे कार्यालय में इंट्रानेट पर आपस में चैट करने के लिये प्रयोग में लाया जाता है..

"काम.. काम.. और बस काम.. और क्या कर सकता हूं?"

"कित्ता काम करेगा भाई? चल छोड़ ये सब, पता है? कल तेरी भाभी मुझे सॉरी बोली.. :)"

"अच्छा!!"

"हां, अब ये मत पूछना कौन वाली? :D"

"ये कंफ्यूजन तो है ही कि कौन वाली?"

"अबे वही, जब तू इस ब्रांच में था तब मैं उस पर लाईन मारता था.."

"फिर भी कंफ्यूजन है, कि कौन वाली? अबे तू भी तो इतने सारे पर लाईन मारता था.."

"अबे घबरा मत तेरी एंजलीना जोली पर अभी भी लाईन नहीं मारता हूं.. बस कभी हाय-हेलो हो जाता है.."

"तो फिर कौन है?"

"अबे वो एच.आर. फोर्थ फ्लोर वाली.."

"क्या सच में? वो सॉरी बोली!! क्यों भाई??"

"यही तो सीक्रेट है.. मगर कल मुझे सॉरी बोली.."

"बता भी दे कि क्यों बोली?"

"ठीक है, घर आकर बताता हूं.. बड़ी लम्बी कहानी है.."

"ठीक है.. चल अब काम कर और मुझे भी करने दे.."

ये लम्बी कहानी शिवेन्द्र को रात में भी पता चले या ना चले, मगर आपको सुना देता हूं.. दरअसल लम्बी छोटी कहानी जैसी कुछ बात नहीं है, वो तो हुआ यूं कि मैं कल आफिस से घर जाने के लिये निकल रहा था.. मेरे ब्रांच में सबसे नीचे वाले फ्लोर पर रिसेप्सन के बगल में एच.डी.एफ.सी. का ए.टी.एम. मशीन है जिसमें दरवाजा ना होकर एक परदा टंगा हुआ है क्योंकि वो मशीन बस मेरी कंपनी के कर्मचारियों के लिये ही है.. और जिस लड़की के बारे में मैं बाता कर रहा था वो वहां पैसा निकाल कर परदे से बाहर निकल रही थी और गलती से उसने अपना पैर मेरे पैर पर डाल दिया.. फिर अकचकाकर सॉरी बोली और मैंने इट्स ओके कहा.. फिर वो अपने रास्ते और मैं अपने रास्ते..

इसे दोस्त के साथ हुई एक चुहलबाजी समझ लें.. जिसके लिये मैंने बस यूं ही सस्पेंस बना डाला.. :)

Saturday, October 11, 2008

अंततः मैं इंडियन आयडल में चुन लिया गया :)

मेयांग चांग - ये है इंडियन आयडल का चेन्नई चैप्टर.. मंदिरों और खूबसूरत समुद्र तट के लिये प्रसिद्ध इस शहर में हम आये हैं साल 2008 के इंडियन आयडल के लिये संगीत के जूनूनी लोगों का चुनाव करने.. तो आप क्या सोचते हैं? क्या आज हम इस शहर से अपने सपनों के गायक का चुनाव कर पायेंगे?
दिपाली - कहीं उत्साह है तो कहीं घबराहट.. आखिर हो भी क्यों ना.. संगीत प्रेमियों के लिये यही तो सपनों की मंजिल भी है.. जैसे जैसे समय बीतता जा रहा है वैसे वैसे माहौल गरमाता जा रहा है.. और अभी-अभी हमारे जजेस भी यहां आ चुके हैं.. उत्साह के साथ कंटेस्टेंट्स ने उनका स्वागत किया..

(15 मिनट बाद..)

उफ्फ.. कितनी गर्मी है.. फिर भी लोगों का उत्साह अपने एक्सट्रीम पर है.. जितनी गर्मी इधर बाहर है उससे ज्यादा गर्मी अंदर जजेस पर भी छाई हुई है.. अभी वक्त है इम्तेहान का.. सिर्फ एक मौका मिलेगा सुनहरे भविष्य से हाथ मिलाने का.. एक मौका जजेस को इंप्रेस करने का.. सभी कंटेस्टेंट्स तैयार हो जाईये.. ये मौका बार बार नहीं आता.. जितने सतर्क कंटेस्टेंट्स हैं उतने ही जजेस भी.. आखिर आज उनका भी तो इम्तेहान है.. अंदर जाकर दिखा देना है कि चेन्नई में भी है कुछ बात..

(काफी देर बाद..)

मैं मन ही मन सोचते हुये, "चलो अब मेरा समय भी आ ही गया.." धरकते हुये दिल से मैं अंदर गया.. सोचते हुये, "पता नहीं क्या होगा अंदर.. खैर जो होगा देखा जायेगा.." अंदर पाया कि पिछले प्रतियोगी से जजेस बहुत चिढे हुये से लग रहे थे..

अनु मलिक - आईये.. आप भी आइये.. क्या सुनाना चाहते हैं आप?
जावेद अख्तर - आप पिछले प्रतियोगी कि खीज इन पर क्यों उतार रहे हैं?
अनु - लो.. मैंने क्या कह दिया?
जावेद - जो कहना था वह तो आपने पहले ही कह दिया..
कैलाश खेर - हा हा हा..
सोनाली - अरे अभी तो आप लोग बहस करना बंद करें.. हां तो आप कहां से हैं?

मैं - जी मैं पटना बिहार से..

सोनाली - बिहार से और यहां चेन्नई में? क्या कर रहे हैं आप यहां पर?

मैं - जी हां.. मैं यहां एक साफ्टवेयर कंपनी में काम करता हूं..

सोनाली - हां तो गाईये..

मैंने गाना शुरू किया..

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अनु - ये गाना है? आप क्या सोचते हैं, साफ्टवेयर बनाते हुये आप गाना भी गा सकते हैं?
कैलाश - मेरे मुताबिक तो कुछ बात है इसकी आवाज में.. मेरी तरफ से येलो कार्ड के लिये हां है..
अनु - मानता हूं कि लय सही पकड़ा इन्होंने मगर ये आवाज सही है गाना गाने के लिये?
कैलाश - आप जितनी भी सूफी कव्वालियां सुनेंगे, आपको ऐसी ही भाड़ी आवाज सुनने को मिलेगी..

मैं मन ही मन सोचते हुये, "अरे यार हां करना है तो करो नहीं तो निकाल दो ना.. इतना नाटक क्यों कर रहो हो यारों.. मैं कौन सा इंडियन आयडल बनने आया था.. अपन भी तो टाईम पास कर रहा है यार.. :)"

जावेद - तुम एक काम करो, एक और गीत सुना दो..


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जावेद - बस.. मेरी तरफ से यह येलो कार्ड पक्का है..
सोनाली - मेरी तरफ से भी..
उधर अनु मलिक गुस्से से मुझे देखे जा रहे थे और मैं खुशी-खुशी येलो कार्ड लेकर बाहर निकला.. खुशी से चीखते हुये..

तभी आवाज आई.. अबे साले! क्यों नींद में चिल्ला रहा है? खुद तो सोता नहीं है और किसी दूसरे को भी नहीं सोने देता है.. घड़ी देखा तो रात के तीन बज रहे थे.. सोचा चलो देखता हूं कि सच में इंडियन आयडल चेन्नई कब आ रहा है.. कंप्यूटर चालू किया और इंटरनेट पर सर्च किया.. पता चला कि चेन्नई नहीं आ रहा है.. बल्की आजकल जो भी दिखा रहा है उसकी रिकार्डिंग मई महिने में ही हो चुकी थी.. सो अगर बैंगलोर जाकर आडिसन देना भी चाहूं तो नहीं दे सकता.. खैर चलो सोने चलता हूं.. शायद फिर सपने में आगे का एपिसोड दिख जाये.. :)

Saturday, October 04, 2008

तुम बहुत दुबले हो, इज दिस राईट फौर यू?

एक दिन जब मैं मोटा हो जाऊंगा तब,
हवायें उड़ा ना पायेंगी मुझे..

लोग मुझे मोटा कहकर पेपरवेट कि तरह,
मेरी बातों को दबाने का प्रयास भी किया करेंगे..

किसी मटके सा मेरा पेट होगा,
गालें फुली होंगी चर्बी से..

किसी मोटे सेठ सा मेरा हुलिया होगा
लोग मुझे उसी स्तर का समझ सलाम ठोकेंगे..

गरीबी रेखा से नीचे वालों के लिये,
मैं ईर्ष्या की वस्तु होऊंगा..

अपने दबे-पिचके पेट, सूखे गालों कि तुलना
वो मुझसे किया करेंगे..

इज्जत का चिथड़ा उड़ाकर
ऐ मोटे कहकर दोस्त लोग बुलायेंगे..

मैं मन ही मन गालियां देकर
और उपर से खींसे निपोर कर रह जाऊंगा..

एक दिन जब मैं मोटा हो जाऊंगा तब,
हवायें उड़ा ना पायेंगी मुझे..