मंगलवार को जब सुबह १० बजे यूनुस जी का फोन आया था तब उन्होने मेरी आवाज सुन कर सबसे पहले कहा की आपकी आवाज तो बहुत ही अच्छी है, आप गलत जगह पहुंच गए हैं.. एक आवाज के धनी व्यक्ति के मुंह से ये सुनना एक अलग ही बात है.. उनसे ये सुन कर मेरी हालत लगभग वैसी ही हो गई थी जैसे की किसी स्कूली बच्चे की हो जाए अगर उसे सचिन तेंदुलकर आकर कहे की तुम बहुत बढ़िया क्रिकेट खेलते हो.. :) मैं बचपन से ही उनकी आवाज सुनता आ रहा हूँ, और उनकी आवाज बहुत पसंद भी करता था.. कई बार दोस्तों के बीच किसी रेडियो उद्घोषक की नक़ल करते हुए कुछ कहता था तो या तो अमीन सयानी या फिर यूनुस खान की ही नक़ल करता था.. हाँ ये बात मैं जरूर स्वीकार करूंगा की पहले मैं रेडियो के उद्घोषकों के नामो को उतने ध्यान से नहीं सुनता था जितना आज सुनता हूँ, मगर यूनुस खान का नाम तो जरूर याद रहता था..
जब पहली बार मैंने रविवार की रात उनसे बात की तो वो बात मिनट भर से भी कम समय के लिए हुई, मगर उनसे बात करने के बाद मेरी पहली प्रतिक्रिया मेरे दोस्तों ने सुनी जो कुछ यूं थी.. "अरे यार पता है मैंने अभी यूनुस जी से बातें की.. फोन पर भी उनकी आवाज बिलकुल वैसी ही थी जैसी की रेडियो से आती है.. बिलकुल मख्खन जैसी.. :D"
जब एक बार उनसे बातों का सिलसिला शुरू हुआ तो बात कहीं से कहीं पहुंच गया.. पहले मैं सोच रहा था की रेडियो और ब्लौग के अलावा और क्या बाते करूंगा, मगर यहाँ तो चेन्नई, मुम्बई, रेडियो, ट्रैफिक और ना जाने क्या क्या बाते निकलती चली गई.. हमारे बीच की बातें औपचारिकता से निकल कर कब अनौपचारिकता पर पहुंच गई इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं की मैंने उन्हें बीच में किसी बात पर ये भी कहा की "जब आपको मुझे डांटने का मौका मिले तो डांट दीजियेगा.. मैं बुरा नहीं मानूँगा.. वैसे भी किसी बड़े से डांट खाए बहुत दिन हो गए हैं.. :)"
ऐसा लग ही नहीं रहा था की मैं उनसे पहली बार बात कर रहा हूँ, सच्ची बात कहूं तो अपने करीबी मित्रों से भी आजकल इतनी लम्बी बात नहीं हो पाती है फोन पर जितनी की उनके साथ हुई.. और उनसे बात करके इतनी ख़ुशी हुई की मैं उस दिन अतिव्यस्त होते हुए भी पूरे उत्साह के साथ सारा काम किया और उसी उत्साह के साथ घर भी लौटा..
उन्होने मुझे मुम्बई आने का न्योता भी दिया, अब विविध भारती को अन्दर से देखने का मौका भला मैं क्यों चुकाने वाला हूँ :D सो झटपट न्योता स्वीकार करना चाहा मगर अपनी विवशता भी उन्हें बताई की अगर कुछ दिनों की छुट्टी मिलती है तो घर से इतनी दूर रहता हूँ की सीधा घर भागने का ही ख्याल आता है.. वैसे भी मुम्बई में कई अजीज दोस्त हैं जो की अगर मैं कभी मुम्बई जाऊं तो अपने पलकों को बिछा कर मेरा स्वागत करने को तैयार मिलेंगे.. और अब तो यूनुस जी भी हैं.. :)
Keyword : Yunus khaan, Radio, First talk..
जब पहली बार मैंने रविवार की रात उनसे बात की तो वो बात मिनट भर से भी कम समय के लिए हुई, मगर उनसे बात करने के बाद मेरी पहली प्रतिक्रिया मेरे दोस्तों ने सुनी जो कुछ यूं थी.. "अरे यार पता है मैंने अभी यूनुस जी से बातें की.. फोन पर भी उनकी आवाज बिलकुल वैसी ही थी जैसी की रेडियो से आती है.. बिलकुल मख्खन जैसी.. :D"
जब एक बार उनसे बातों का सिलसिला शुरू हुआ तो बात कहीं से कहीं पहुंच गया.. पहले मैं सोच रहा था की रेडियो और ब्लौग के अलावा और क्या बाते करूंगा, मगर यहाँ तो चेन्नई, मुम्बई, रेडियो, ट्रैफिक और ना जाने क्या क्या बाते निकलती चली गई.. हमारे बीच की बातें औपचारिकता से निकल कर कब अनौपचारिकता पर पहुंच गई इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं की मैंने उन्हें बीच में किसी बात पर ये भी कहा की "जब आपको मुझे डांटने का मौका मिले तो डांट दीजियेगा.. मैं बुरा नहीं मानूँगा.. वैसे भी किसी बड़े से डांट खाए बहुत दिन हो गए हैं.. :)"
ऐसा लग ही नहीं रहा था की मैं उनसे पहली बार बात कर रहा हूँ, सच्ची बात कहूं तो अपने करीबी मित्रों से भी आजकल इतनी लम्बी बात नहीं हो पाती है फोन पर जितनी की उनके साथ हुई.. और उनसे बात करके इतनी ख़ुशी हुई की मैं उस दिन अतिव्यस्त होते हुए भी पूरे उत्साह के साथ सारा काम किया और उसी उत्साह के साथ घर भी लौटा..
उन्होने मुझे मुम्बई आने का न्योता भी दिया, अब विविध भारती को अन्दर से देखने का मौका भला मैं क्यों चुकाने वाला हूँ :D सो झटपट न्योता स्वीकार करना चाहा मगर अपनी विवशता भी उन्हें बताई की अगर कुछ दिनों की छुट्टी मिलती है तो घर से इतनी दूर रहता हूँ की सीधा घर भागने का ही ख्याल आता है.. वैसे भी मुम्बई में कई अजीज दोस्त हैं जो की अगर मैं कभी मुम्बई जाऊं तो अपने पलकों को बिछा कर मेरा स्वागत करने को तैयार मिलेंगे.. और अब तो यूनुस जी भी हैं.. :)
Keyword : Yunus khaan, Radio, First talk..
