Showing posts with label तमिल टाईगर. Show all posts
Showing posts with label तमिल टाईगर. Show all posts

Monday, May 18, 2009

प्रभाकरण कि मौत तमिल लोगों कि नजर से

थोड़ी देर पहले ही यह खबर मिली कि प्रभाकरण मारा गया.. मुझे यह खबर एक तमिल मित्र द्वारा मिली.. उसके चेहरे पर कोई खुशी नहीं थी, सो मैं संकोच में आ गया कि इन लोगों के सामने मुझे किस तरह कि प्रतिक्रिया व्यक्त करनी चाहिये? अगर सिर्फ मेरी बात की जाये तो मुझे खुशी ही हुई यह खबर सुन कर मगर यह खुशी उन लोगों के सामने व्यक्त करना मुझे ठीक नहीं लगा जो मेरे शुभचिंतक भी हैं और साथ ही इस खबर पर उदास भी..

मैंने उन्हीं से जानना चाहा कि आप ही बतायें कि इस खबर पर तमिल लोगों कि क्या प्रतिक्रिया आयेगी?

उनका कहना था कि प्रभाकरण का भारत के प्रति बस एके ही गलती थी जिसके कारण उसे भारत का समर्थन नहीं मिल सका.. और वो थी राजीव गांधी कि हत्या.. अगर इस बात को हटा दिया जाये तो तमिल टाईगर किसी भी नजर से किसी अन्य आतंकवादी संघटन जैसी नहीं थी.. जब वह अपने चरम पर थी तब उसकी श्रीलंका में एक अलग सरकार जैसी चलती थी जिसने वहां के तमिल लोगों के भले के लिये बहुत सारे काम किये.. इसी तरह की कई बाते उसने मुझसे कही जो भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ कोई इंसान ही बोल सकता है.. साथ ही साथ उसने एक बात और कही, "जो भी तमिल नहीं है वह इस भावनात्मक पहलू को कभी नहीं समझ सकता है.." जो एक हद तक सही भी है..

मेरे मित्र को एक उम्मीद यह भी है कि शायद अभी प्रभाकरण जिंदा हो.. उसका कहना है कि प्रभाकरण हमेशा अपने दो हमशक्लों को रखता है(जिसकी पुष्टी कई समाचार साईट पर भी कि गई है), और शायद उन्हीं हमशक्लों में से कोई मारा गया हो शायद.. ये कुछ-कुछ ऐसी ही उम्मीद है जैसे कि किसी परी कथा का नायक दुश्मनों के लिये मर चुका होता है मगर असल में वह अचानक हमला करके सभी दुश्मनों को धराशायी कर देता है..

मैं तमिल बनाम सिंघल के बहस में नहीं पड़ना चाहता हूं, मगर यहां के तमिल लोग भावनात्मक रूप से तमिल टाईगर से बहुत जुड़े हुये हैं.. प्रभाकरण भले ही मारा गया हो मगर वह एक मिथक के रूप में तमिल लोगों के जेहन में हमेशा जिंदा रहने वाला है..

नोट - इस लेख को प्रभाकरण के पक्ष में लिखा गया लेख ना माना जाये.. जो भी बातें लिखी गई हैं वे सभी तमिलनाडु के निवाशियों से ली गई राय के बाद लिखी गई है..