Thursday, February 21, 2008

अपना पोस्ट हिट करें, ब्लौगवाणी की सहायता से

क्या आप चाहते हैं की आपके किसी भी पोस्ट को लोग ज्यादा से ज्यादा देखें? आप अपनी ये इच्छा ब्लौगवाणी की सहायता से आसानी से पूरा कर सकते हैं.. कैसे? चलिये मैं ही बता देता हूं.. आपको करना कुछ नहीं है बस अपने शीर्षक में ब्लौगवाणी की चर्चा कर दें.. अगर बुराई कर सकते हैं तो ज्यादा अच्छा रहेगा.. बस आपको इतना ही करना होगा और लोग दौड़े चले आयेंगे आपके पोस्ट पर.. मुझे पता है की लोग मेरे इस पोस्ट को पढने के लिये आयेंगे तो जरूर मगर गालीयां देते हुये जायेंगे.. :)
आज सुबह मेरे कंप्यूटर से ली हुई इस चित्र को एक नजर देखें..

यहां मैं किसी पर आरोप नहीं लगा रहा हूं.. ये मेरा अपना अनुभव भी है.. मैंने इससे पहले 2 पोस्ट ब्लौगवाणी के नाम से लिखे थे और उसे अन्य किसी पोस्ट से औसतन ज्यादा पाठक मिले..

एक नजर इस मजेदार चीज पर भी डालें.. ये महाशय 0 मित्रों को धन्यवाद कह रहें हैं.. चलो भाई, अगर कोई मेरे इस पोस्ट को नहीं पढता है तो भी उसे धन्यवाद दे ही देता हूं.. :)

मेरे पास आजकल समय ना होने के कारण मैं ये बकवास आज अपने ब्लौग पर किये जा रहा हूं.. अगर इसे पढकर आपके सर में दर्द हो जाये तो क्षमा चाहूंगा.. :)

10 comments:

  1. सही आइडिया है । जब हिट्स के लिए इतना बेकरार हो जाएँगे तो इसे भी आजमा लेंगे।
    घुघूती बासूती

    ReplyDelete
  2. हा हा हा समय का बहुत सदुपयोग कर रहे हो, लगे रहो

    ReplyDelete
  3. एक समय लोग हिट के लिए नारद शब्‍द के इस्‍तेमाल पर जोर देते थे.

    वक्‍त बदलता है :)

    ReplyDelete
  4. यह तो पुराने हकीमी दवाखाने की दवाई है। नयी नयी पुड़िया में समय समय पर मिलती है। जब कमजोरी महसूस हो, ली जा सकती है! :-)

    ReplyDelete
  5. दूर घट रही घटनाओं के बजाय हम अपने आस पास के प्रति अधिक ध्यान देते हैं. ब्लागवाणी भी हमारे आस पास से ही है. जब भी कभी हम अपने ब्लाग की दुनियां के बारे में बातें करेंगे तो इस पर अन्य बातों के बजाय अधिक ध्यान जायेगा ही.

    ReplyDelete
  6. bhiyaji hamne to ajj hi ye dukan dekhi hay,abb kuch khayen piyen gey to batayen gey kaysa hay
    hing goli

    ReplyDelete
  7. चौराहाFebruary 21, 2008 7:03 PM

    शाबाश गुरू कहानी बताते बताते आपने भी अपने शीर्षक में "ब्लॉगवाणी" ठेल ही दी। किसी की हो ना हो आपकी ये वाली तो लोकप्रिय हो ही गई। लगे रहो।

    ReplyDelete
  8. हा हा!! पुराना नुस्खा-अभी भी असरदार.

    ReplyDelete
  9. प्रशांत, मैने भी कुछ यही महसूस किया है जिसके बारे में आपने लिखा है।

    ReplyDelete