Wednesday, June 25, 2008

अब मैं बड़ा हो गया हूँ माँ..


जो आप नहीं कर पाई,
वो दुनिया ने कर दिखाया..
अब मैं बड़ा हो गया हूँ माँ..

कुछ अच्छा लगता है तो
मुस्कुरा देता हूँ..
कुछ बुरा लगता है तो
मुस्कुरा देता हूँ..
अब मैं बड़ा हो गया हूँ माँ..

वो अछूत सी लगने वाली सब्जी,
भी अब खा लेता हूँ..
रात में अब चावल से भी
परहेज नहीं है..
अब मैं बड़ा हो गया हूँ माँ..

कोई अब पूछता नहीं,
की कहाँ जा रहे हो..
कोई अब पूछता नहीं
की किससे मिल के आ रहे हो..
अब मैं बड़ा हो गया हूँ माँ..

कोई अब पूछता नहीं
की खाना खाए या नहीं..
कोई अब पूछता नहीं
की खाए तो क्या खाए..
अब मैं बड़ा हो गया हूँ माँ..

कोई दोस्त अब कहीं
बुलाते नहीं..
उनके साथ ना जाने पर
पहले जैसे कुछ सुनाते नहीं..
हर पल ये अहसास दिलाते हैं..
अब मैं बड़ा हो गया हूँ माँ..

कुछ मिलने पर ना अब वो
पहले सा उत्साह आता है..
ना कुछ खोने पर आँखें
नम होती है..
अब मैं बड़ा हो गया हूँ माँ..

जिसकी चाहत बचपन से थी,
बड़ा होने की..
अब वो नहीं चाहता हूँ..
पर क्या करूं माँ..
अब मैं बड़ा हो गया हूँ माँ..

ये कविता मैंने बहुत पहले लिखी थी.. मदर्स डे पर.. मुझे याद है, मम्मी बहुत भावुक हो गई थी इसे पढ़कर..

21 comments:

  1. बहुत शानदार कविता है. कोई भी पढ़ेगा तो यही कहेगा, प्रशांत.

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  2. VERY NICE

    BHAI SIDHE DIL KO CHOOTI HAI YE KAVITA.

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  3. नमस्कार भाई जी,
    दिल में उतर जाने का हुनर है आपमें.बधाई हो जी
    आलोक सिंह "साहिल"

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  4. bhut hi bhavpuran kavita.ati sundar. likhate rhe.

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  5. मम्मी को भावुक होना ही था। आप ने इतना खतरनाक जो लिखा है।
    और अब मम्मी ने इसे पढ़ लिया तो आप को पूछने वाली की तलाश तेज हो जानी है।

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  6. बहुत बढ़िया लिखा भाई !

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  7. प्रशांत कविता तो बहुत ही अच्छी लिखी है आपने।

    दिनेश जी की बात भी सही लग रही है। :)

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  8. भाई बहुत बढ़िया. शानदार.

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  9. लड़का बड़ा हो गया है, अब शादी का इंतजाम किया जाये....

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  10. सुन्दर लगी कविता, मित्र।

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  11. वाकई, बड़े हो गये हो..भावुक तो हो ही जायेंगी.

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  12. बहुत प्यारी कविता, सीधे दिल को छू गई

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  13. Prashantbhai
    Nice poem.

    -Harshad Jangla
    Atlanta, USA

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  14. बहुत खूब ..सच में बड़े हो गए आप :)

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  15. आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद इसे पसंद करने के लिये..
    जब इसे पहली बार मेरे पापा ने पढ़ा तो उन्होंने कहा था कि जो बात दिल से निकलती है वो कभी खाली नहीं जाती है.. दूसरे के हृदय में बैठ जाती है..

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  16. @ दिनेश जी - आपका कमेंट पढ़कर मेरे पापाजी पूछ रहे थे.. बेचारे भूल जाते हैं और आपलोग उन्हें बार-बार याद दिलाते रहते हैं.. :)

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  17. " मम्मी बहुत भावुक हो गई थी इसे पढ़कर.."
    Aur hum bhi ho gaye

    Rohit Tripathi

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  18. प्रशांत भाई हम कितने भी बडे क्यो ना हो जाये मां ओर बाप के सामने हमेशा ही छोटे नजर आते हे, बहुत ही भावपूर्ण कविता कविता लिखी हे आप ने,
    धन्यवाद

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