Monday, June 30, 2008

जिंदगी की छेड़-छाड़

सब पीछे छोड़ कर मैं २ साल आगे निकल चूका था..
जिंदगी कल फिर से मुझे घसीट कर वहीँ पहुंचा गई..
ऐसा लग रहा है जैसे फिर से उसी मुकाम पर खडा हूँ जहां से शुरू किया था..
ये जिंदगी भी अजीब होती है..
चिढा कर कहीं झुरमुठों में छुप सी जाती है..

आज सुबह मैं बैगलोर से वापस लौटा और वहां G Vishwanath जी से भी मिला(और उनकी रेवा कार में घूमने का मौका भी मिला :)).. एक बिलकुल नया सा और अच्छा अनुभव मिला.. शायद अगले २-३ पोस्ट उनके नाम हो जाए.. आज मन कुछ नहीं लग रहा है, सो कल मैं उनके बारे में और उनकी रेवा कार के किस्से सुनाता हूँ..

9 comments:

  1. सुनने को तैयार बैठे हैं।
    घुघूती बासूती

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  2. इंतेज़ार में है जी.. पढ़वाए

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  3. badhia hai aapke kisso ka intezar rahega

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  4. प्रशांत, विश्वनाथ जी के साथ मिलना निश्चित रूप से अच्छा अनुभव रहा होगा. अगली पोस्ट का इंतजार है भाई.

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  5. विश्वनाथ जी तो पिगीबैकिंग में ही हिट हो गये। जब अपने नन्दी पर सवार होंगे (अर्थात अपना ब्लॉग बनायेंगे) तब तो छटा देखने वाली होगी!

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  6. सब पीछे छोड़ कर मैं २ साल आगे निकल चूका था..
    जिंदगी कल फिर से मुझे घसीट कर वहीँ पहुंचा गई..


    -ये क्या हुआ??

    विश्वनाथ जी से साथ बिताये पलों के विवरण का इन्तजार है.

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