Sunday, June 22, 2008

एक लड़की


एक लड़की,
ख्वाबों में जीने वाली लड़की,
ख्वाबों में ही मेरे पास आती,
ख्वाबों में ही मुझे गले लगाती,
ख्वाबों में ही कभी यूं ही,
मेरी राहों से होकर गुजर जाती,
ख्वाबों में अक्सर मैं उसका होता,
मुझे पाकर कभी वो चूम लेती,
कभी गले लगा लेती,
मुझे पाकर वो खुश होती,
हंसती खिल-खिलाकर,
अक्सर मैं कहता,
एक हंसी उधार दे दो,
मैं हंसता कम हूं,
वो कहती,
मैं आपकी ही हूं,
जो चाहे ले लो,
हकीकत का आभास भी था उसे,
मगर वो ख्वाबों में जीती थी..

एक लड़की,
ख्वाबों में जीने वाली लड़की,

12 comments:

  1. बहुत सुन्दर ख्वाब है।

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  2. मम्मी-पापाजी को तो खबर दे दो!

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  3. aapka khwav bhut sundar hai. khwav ko hakikat me badalne me der nhi lagti.

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  4. भाई यह नोटिस हमें है, या
    मम्मी पापा को?

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  5. लगे रहो मुन्ना भाई तभी तो हम बाराती बन पायेगे :)

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  6. क्या बात है?? सब ठीक ठाक तो है..जो भी हो-रची बेहतरीन है कविता.

    एक दिन आप बता रहे थे कि पापा आपका ब्लॉग पढ़ते हैं-इतना नोटिस तो नोटिस करने के लिए काफी है. :)

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  7. हाँ जी.. मेरे पापा पढ़ते हैं इसे.. कभी-कभी मम्मी भी.. और भैया तो हमेशा ही.. :)
    वैसे ये ख्वाब मेरे नहीं.. उस लड़की के हैं.. :)

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  8. वो कौन थी ?
    पिक्चर अभी जारी है :-)
    चित्र भी बढिया है, कविता जैसा ही !

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  9. लड़के के घरवाले ध्यान दें कि लड़का हिंट ड्राप कर रहा है :-)
    वैसे ये पोस्ट भी एक सोचे समझे प्लान का नतीजा है, पहले अपना नौकरी पुराण लिखा गया जिससे कि लडकी के घर वाले ये न समझे कि लड़का कुछ भी नहीं कमाता (शोले इस्टाइल में) | और अब ख्याबों के बहाने दिल की बात,

    बामुलाहिजा होशियार, शहनाई बजने की तैयारी हो रही है :-)

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  10. ख्वाब तो बड़ा ही सुंदर है। जल्दी ही सच हो।

    और प्रशांत बाराती बनने को हम भी तैयार है। :)

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  11. दंग रह गया चित्र देखकर!
    कितना सुन्दर चेहरा!
    फ़ूल तो बाद में नज़र आए।

    कविता भीं पढ़ी।
    प्रेम का "वायरस" है यह।
    जोरदार संकेत मिल रहें हैं इस चित्र और कविता से।
    विवाह के सिवाय कोई इलाज नहीं।
    कौन है वह भाग्यशाली लड़की?
    क्या अगले ब्लॉग पोस्ट में विवरण मिलेंगे?
    शुभकामनाएं
    गोपालकृष्ण विश्वनाथ, जे पी नगर, बेंगळूरु

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