Friday, February 06, 2009

अरे! मैं लेखक कब से बन गया?

मेरे कल के पोस्ट(हमें नहीं पढ़ना जी आपका ब्लौग, कोई जबरदस्ती है क्या?) पर सबसे अंत में रोहित त्रिपाठी जी का कमेन्ट आया, जिसका उत्तर पहले मैंने मेल में लिखा.. मगर बाद में लगा कि इसे सार्वजनिक करने में भी कोई बुराई नहीं तो मैं इसे पोस्ट कर रहा हूँ..

उन्होंने ने लिखा था -
प्रशान्त सर, लोग कुछ समझ कर ही तो मेल करते होगे ना आपको? आपके ब्लॉग पर 40 कमेन्ट उसके बेचारे के ब्लॉग पर एक भी नहीं और 40 कमेन्ट देख कर लगा कि शायद बहुत बड़े लेखक है जो कि इनके ब्लॉग पर इत्ते कमेन्ट आये इसलिए बेचारा भेज देता है कि आप कुछ लिख देगे उसकी पोस्ट पर तो मन कितना खुश हो जायेगा कि कितने बड़े लेखक ने उसके पोस्ट पर कमेन्ट किया :-) :-) कुछ सोचिये प्रशान्त भाई.

मेरा उत्तर है उन्हें -
आपका कहना सही है रोहित जी,

मगर शायद आप दूसरी बार मेरे चिट्ठे पर आये हैं(यह आपका मेरे चिट्ठे पर दूसरा कमेन्ट है सो बस एक अंदाजा लगाया है :)) सो कुछ बातें मैं पहले बताना चाहूँगा..

मैं कोई बड़ा या छोटा लेखक नहीं हूँ.. या यूँ कहें कि लेखक हूँ ही नहीं तो ज्यादा अच्छा रहेगा.. अगर आप मेरे कुछ पुराने पोस्ट देखेंगे तो आप जान जायेंगे कि मैं भी किसी आम ब्लॉगर कि तरह ही हूँ जिसकी कोई पोस्ट बहुत पढ़ी जाती है और 40-50 से ज्यादा कमेंट्स भी मिलते हैं तो वहीँ दूसरी तरफ कुछ को 3-4 से ज्यादा कमेंट्स नहीं मिलते हैं(और वे 3-4 कमेंट्स भी उन्हीं के होते हैं जिनसे एक तरह कि आत्मीयता हो गयी है इस चिट्ठाजगत में)..

मैं दिन भर में आने वाले लगभग हर पोस्ट पर एक नजर जरूर डालता हूँ और जो मुझे पढने लायक लगता है उसे पढता जरूर हूँ.. और जिसे भी देखकर ऐसा लगता है कि कमेन्ट करना चाहिए उस पर कमेन्ट भी जरूर करता हूँ.. मगर कमेंट्स से ज्यादा जरूरी पढना समझता हूँ..

एक महाशय मेरे हर पोस्ट पर अपने नये पोस्ट का विज्ञापन चढा जाते हैं.. और उनका वह विज्ञापन उस दिन आये लगभग हर पोस्ट पर दिखता था.. अगर बिना किसी पूर्वाग्रह के सच्चे दिल से कहूँ तो उनकी कवितायेँ मुझे पसंद है और कई कविताओं कि मैंने जम कर तारीफ भी कि है उनके पोस्ट पर.. मगर बिना पढ़े नहीं.. अच्छे से पढ़कर और सोच समझकर..

लगातार अच्छा लिखो, लोग खुद ही आयेंगे पढने के लिए.. हाँ कुछ दिन इंतजार करना भी होगा.. यही मेरा मानना है.. यहाँ जितने भी लोगों को ढेर सारे कमेंट्स मिलते हैं या ज्यादा पढ़े जाते हैं वे सभी या तो काफी दिनों से हिंदी ब्लॉग दुनिया में लगातार बने हुए हैं या फिर जबरदस्त लेखनी से कुछ ही दिनों में छा गए.. नहीं तो मैं आज देखता हूँ कि 2-3 साल पहले के कई चिट्ठाकार आज दिखाई नहीं देते हैं.. और यही यदा-कदा उनकी कोई पोस्ट आ भी जाती है तो पुराने लोगों को छोड़कर ना तो कोई उन्हें पढना चाहता है और ना ही टिपियाना चाहता है..

अब और क्या लिखूं?

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद..

24 comments:

  1. छाए हुए बॉस.....इतने कमेंट के लिए बधाई हो

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  2. शब के जागे हुए तारों को भी नींद आने लगी... और नींद भी ऐसी की जो दिन में भी पूरी नहीं हो पाती... एक थकान हमेशा तारी रहती है... ब्लॉग पर पोस्ट करना बंद हो गया है, क्या करूँ... नाईट शिफ्ट में जो काम करना पड़ रहा है आजकल, पर जल्दी ही कुछ पोस्ट करूँगा... कुछ भी बेकाम की ही सही... बस आप की नज़रे-इनायत बनी रहे...!!!

    अभी गिंडी में ही रहता हूँ, ओलिम्पिया टेक पार्क के पास, कभी आइये ना... मेरा no है- 09600007390

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  3. लगातार अच्छा लिखो, लोग खुद ही आयेंगे पढने के लिए..

    -उचित सलाह.

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  4. आपने सही लिखा है ।

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  5. सही कहा.....पढने योग्‍य सामग्री हो तो लोग अवश्‍य ही पढ लेंगे पोस्‍ट को.....कुछ देर से ही सही.....सब्र तो रखना ही चाहिए.....और जारी रखना चाहिए।

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  6. सोच तो रही थी आज कट पेस्ट वाली टिपण्णी करूँ...सही लिखा है जी आपने :) पर फ़िर आज पोस्ट करने का खास मन नहीं है...तो बात यहीं ठेल देते हैं, क्या कहते हो भाई? कमेन्ट करने पर ब्लॉग का लिंक अपनेआप आ जाता है, और फ़िर जब वक्त मिलता है उन्हें देख ही लेते हैं...या फ़िर चिट्ठाजगत me कुछ मन माफिक मिला तो पढ़ लिए. ये अपने ब्लॉग का लिंक कहीं भेजने के पक्ष में हम भी नहीं हैं. यहाँ लगातार अच्छा लिखने से अपने आप लोग पढने लगते हैं और दूसरी बात पसंद की होती है. आप कितना भी अच्छा लिखो हो सकता है आप जो लिख रहे हैं उसे पढने में किसी की दिलचस्पी नहीं है तो उसे कहना व्यर्थ जायेगा....और ये कमेंट्स आने तो अब शुरू हुए हैं, यहाँ पर लोग दो दो तीन तीन सालों से हैं. कमेन्ट नहीं आने से लिखना थोड़े बंद करते हैं. सो अपना पोस्ट चापो...और बाकी भगवान पर छोड़ दो :) हम भी यहाँ तुम्हें छोड़ देते हैं...बहुत लंबा हो गया कमेन्ट :)

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  7. अगर किसी को एक बार आपके चिट्ठे पर आकर कछ हासिल होता है तो तभी वो दूसरी बार आएगा.इसलिए टिप्पणीयों का मोह त्याग कर केवल अपने लेखन पर ध्यान देना चाहिए.

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  8. सही कहा आपने ,जब अच्छा लिखते हैं तो उस दिन हमें ख़ुद को पता होता हैं की आज थोड़ा ठीक ठाक लिखा गया हैं ,बाकि दिन पता होता हैं आज तो कुछ तो भी लिख दिया हैं ,पाठक बहुत समझदार होते हैं ,जो अच्छा होता हैं उस पर ही कमेन्ट देते हैं ,आपने बिल्कुल सही कहा ,मैं यही बात मानती हूँ.

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  9. लगातार अच्छा लिखो, लोग खुद ही आयेंगे पढने के लिए..

    100% True

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  10. haan sahi hai, achha likhne wale ke blog par fir jane ka dil karta hai lekin ....(maaf kijiyega abhi nai nai hoon ), hanlaki aap sabhi nye chithhon ko pad lete hain ,par nye blogger ko ek bhi tippani mil jati hai to uska utsaah badh jata hai aur vo fir likhna chahata hai.aur sudhaar to samay ke saath hota chala jata hai bas likhne ka kram na tootne paye . isliye tipani me jyada nahin to "likhte rahiye " hi likh dene me kuch buraai to nahin .shuru me mujhe bhi "udantashtari ji" ki tipanniyon se bal mila tha.sadar bhawna

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  11. एकदम सही बात है मैं भी इस बात से सहमत हूँ की लेखनी का स्तर अगर अच्छा हो तो कभी न कभी पहचान मिलेगी, भले ही वक्त लगेगा। सफलता का कोई 'शार्टकट' नही! आपकी विडियो देखी थी ऑरकुट में, अपने दिन याद आ गए! हम भी ऐसे ही डरते थे नीचे उतरने में :)

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  12. मुबारक हो लेखकत्व प्राप्ति के लिए :-)

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  13. बढ़िया सिनर्जेटिक लिखा जी।
    आप हमारे ब्लॉग पर भी आइयेगा!
    भीगी पलकें! :)

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  14. मैं तो भाई लिखता हूँ,
    मेरा नारा है..
    कचरा पढ़ो..कचरा लिखो.. और लिखते रहो ।
    कभी तो कचरे-डिब्बे की ज़रूरत पड़ेगी ?
    यह अच्छा लिखना क्या होता है, भईय्या ?
    अपने लिखे गदहा-पचीसी पर लोग ऎसा इतराते हैं, कि जैसे बुकर प्राइज़ लेने के लिये अगली फ़्लाइट से जाने ही वाले हों ।

    सो, इस कचरे ज़माने में कचरा लिख वत्स !
    अच्छा लिखता पढ़ना पड़ेगा, सो मैं शरम के मारे ईहाँ अयबे नहीं करता हूँ :)

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  15. सही कहा १००% सहमती.. अगर आप हमें पसंद है तो ढु्ढते हुए आयेगें.. विज्ञापन से चिढ़ सी होती है.. और पसंद हो तब भी ना देखे.. इस चर्चा का सकारात्मक प्रभाव होगा.. पक्का होगा.. कुछ तो दिखने लगा है..

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  16. अच्‍छी चीजों के कद्रदान अभी भी हैं मान्‍यवर।

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  17. आजकल भाई साहब का मूड खिसका सा लग रहा है। कट लेने में ही भलाई है।

    आप बस लिखते रहिये। कुछ समस्यायें हैं, जिनसे सारा ब्लॉगजगत त्रस्त है।

    व्यक्तिगत रूप से वाह-वाह वाले कमेंट्स मुझे रूचते नहीं। बनावटी लगते हैं।

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  18. अरे! मैं लेखक कब से बन गया? अरे भैया प्रशान्त आप वाकई महान हो। आपके खिलाफ़ इत्ता बड़ा आरोप लग गया और आप मुस्करा रहे हैं। धन्य हैं आप! आपको लेखक कहकर लोग आपके खिलाफ़ साजिश करके आपको कविता लिखने वंचित करना चाहते हैं। आप इस साजिश को समझिये और बेनकाब करिये। हम आपके साथ हैं! :)

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  19. हम और आप सब समझदार हैं। सब जानते हैं कि हम लोग यहां क्‍यों हैं और क्‍या चाहते हैं। अपने जैसे कुछ लोग मिलते हैं तो प्रसन्‍न हो जाते हैं और कुछ अलग सा मामला लगता है तो कल्‍टी हो जाते हैं।

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  20. arre baap re.. jiska darr tha wahi kar dala aapne to :-) BTW mail nahi mili aapki :-) aaj puja di ke blog pe se phir aapke blog par aana hua :-) mai pahle bhi aata hu Prashnat bhai lekin likhne mein mahir nahi tha na (aur na ab hi hu) to isliye koi comment likhe bina chala jata tha :-) aur shayad pichle comment mein bhi mai aapko apni baat thik se samjha nahi paya :-) lekin yeh post bhi bahut achi likhi aapne ki jo acha likhega use hum kahi na kahi se dhoondkar padh hi lege jaise maine aapko dhoondh liya :-) keep writing

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