Monday, February 02, 2009

और किताबों से 1.5 घंटे की दूरी बढ़ गयी

मेरे लिये सबसे अच्छा समय किताबों को पढ़ने का बस में सफर करते समय होता था.. हर दिन सुबह में 1 घंटे और रात में लगभग 30 से 45 मिनट.. कुल मिलाकर 1.5 घंटे हर रोज.. जबसे मैंने गाड़ी खरीदने का सोचा था तभी से मेरे मन में यह बात थी की बाईक आने के बाद मेरा यह समय छीनने वाला है.. क्योंकि घर पहूंच कर और कुछ करने का मन ही नहीं करता है तो किताबों की क्या बात है? वैसे भी किताबें पढ़ने के लिये रात के समय बत्ती जलाना एक तरह से पूरे घर में सभी के लिये कष्टप्रद हो जाता है.. अब कौन सा समय निकालूं किताबों के लिये, मैं यही सोच रहा हूं..

कुछ कुछ किताबों की ही तरह कई जरूरी फोन भी मैं बस से ऑफिस आते या जाते समय कर लिया करता था.. अब उसके लिये भी अलग से समय निकालना पर रहा है.. मगर एक बात तो जरूर है, कई फोन मैं बस का इंतजार करते हुये समय बिताने के लिये भी किया करता था.. अब उस तरह के मोबाईल बिल से छुटकारा मिल रहा है.. मगर वो बाईक के पेट्रोल में एडजस्ट हो जाता है.. :)

10 comments:

  1. जीवन में 24 घंटे के दिनभर और महीने के सीमित आय में कितना हिसाब किताब करना पडता है .... है न ?

    ReplyDelete
  2. किस्मत वालो हो जो पढने का समय मिलता रहा है।

    ReplyDelete
  3. १.५ घंटे नही बढी दोस्त.. हर रोज के १.५ घंटे.. वैसे जिस दिन थोडा जल्दी हो.. बस से निकलने में बुराई नहीं है.. ५०-५० कर लो.. और पब्लिक ट्रांसपो्र्ट इस्तेमाल करना समझदारी का काम है...हफ्ते में २-३ दिन बस से.. कुछ तो दुरी कम होगॊ..और जेब भी गर्म रहेगी..

    ReplyDelete
  4. kitne aalsi ho yaar, aise thode chalta hai...simple sa upaay hai ki ek table lamp kharid lo.ham hostel me the to ek ladki ne isi tarah apni roommate ko table lamp gift kar diya tha...ki ab padho aur mujhe chain se sone do. tumhare kisi dost ko itni akal nahin aayi abhi tak!?

    ReplyDelete
  5. हमारा भी कुछ ऐसा ही हाल है, बस में तो नही पर अक्सर लम्बी ट्रेन यात्रा करनी पड़ती है जिसमें बहुत वक़्त होता है वह सब करने का जो रोजमर्रा में नही कर पाते। कितनी ही किताबें ट्रेन में ख़त्म की हें। अभी एक पुस्तक मेला गए वहा से ३-४ ट्रेन यात्राओं के लिए पुस्तकें लेकर रख लीं!
    हाँ जिस दिन ज्यादा पैसे हो जायेंगे और जहाज से आना जाना होगा उस दिन..

    ReplyDelete
  6. विद्यार्थी परेशान कि किताब पढ पढ के हैरान हो गये, आप परेशान कि पढने में १.५ घंटे की दूरी हो गयी।

    वैसे भौतिकी में आपके १० नंबर कट गये, समय को दूरी का मात्रक बताने पर।

    अब होमवर्क करो और इस दूरी को प्रकाशवर्ष में कन्वर्ट करके अगली पोस्ट में लिखो ....:-)

    ReplyDelete
  7. इधर से घटाया उधर जोड़ा रिजल्ट सिफर ही हुआ ना, माइनस नही जाना चाहिये

    ReplyDelete
  8. लगता है बहुत दिनो से बस में नही चढ़े हो... मुझे तो फोन किया नही ....

    ReplyDelete
  9. हर नयी सुविधा कुछ न कुछ छीनती भी है।

    ReplyDelete