Friday, May 22, 2009

अथ श्री रजिस्टर कथा

सुबह-सुबह पूजा कि बक-बक में आप सभी ने पढ़ा होगा "दास्ताने लेट रजिस्टर(पढ़ना ना भूलें, नहीं तो इस कथा का पुण्य पुरा नहीं मिलेगा)".. तो एक रजिस्टर कथा मेरी तरफ से भी सुन ही लें.. इसे सुनने वाले को 10 दिनों तक किसी भी प्रकार के रजिस्टर से छुटकारा मिल जाता है.. ना तो उसे किसी रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने पड़ते हैं और ना ही किसी अन्य प्रकार के रजिस्टर को लेकर इधर-उधर भटकना पड़ता है.. इसे जोर-जोर से उच्चारण समेत पढ़कर दूसरों को सुनाने पर 100 दिनों तक रजिस्टर नामक कष्ट से मुक्ति मिल जाती है..

बहुत समय पहले कि बात है.. चेन्नई नामक शहर में प्रशान्त नाम का एक मनुष्य निवाश करता था.. उसे रजिस्टर देव पर कोई आस्था नहीं थी.. वह अपना हर कार्य कंप्यूटर नामक दानव कि सहायता से करता था.. वह हर दिन घर से ऑफिस के लिये निकलने से पहले ध्यानपूर्वक अपने ऑफिस जाने वाले फौर्मल कपड़े पहनता था और ध्यान से अपना आई.डी.कार्ड साथ में रखता था.. जिससे कि उसे रजिस्टर पर सही ड्रेस कोड में ना आने का कारण या फिर अल्पकालिक आई.डी.कार्ड जारी करवाने के लिये रजिस्टर में कुछ ना लिखना पड़े..

इसी तरह दो साल गुजर गये और उसे कभी भी रजिस्टर पर कुछ भी नहीं लिखना पड़ा.. इससे उसमें अहं कि भावना जागने लगी.. धीरे-धीरे वह समझने लगा कि वह रजिस्टर डेवता से भी ऊपर उठ गया है.. वो जिस किसी के गले में अल्पकालिक आई.डी.कार्ड देखता उसका मन ही मन मजाक उड़ाता.. किसी को जूते में नहीं देखता तब भी उसकी वही मनोदशा होती..

उसके इस व्यवहार से एक दिन रजिस्टर देवता रूष्ट हो उठे और उन्होंने श्राप दे डाला.. उनके श्राप के कारण एक रात दुर्घटना में उसके पैर टूट गया और अगले दिन से वो भी बिना जूते के चप्पल में जाने लगा.. 10-15 दिन तो यूं ही गुजर गये, उससे किसी गार्ड ने चप्पल में आने का कारण रजिस्टर में लिखने को नहीं कहा और इससे उसे लगने लगा कि ड्रेस कोड वाला रजिस्टर यूं ही फालतू का रखा हुआ है..

रजिस्टर देव फिर कुपित हो उठे.. और अगले ही दिन एक गार्ड ने उसे रोक कर बोला कि "चप्पल में आये हैं आप, रजिस्टर पर इसका कारण लिखो".. प्रशान्त ने कहा,"मैं अगले 2 महिनों तक ऐसे ही आने वाला हूं, क्या हर दिन कारण लिखूंगा?" गार्ड ने बोला, "हां, लिखना होगा.." प्रशान्त ने उत्तर दिया, "हर दिन एक ही चीज लिखना ठीक नहीं है, मैं तुम्हारे हेड से बात करना चाहता हूं.." गार्ड ने बहाना बनाया और बोला, "मेरे बॉस अभी यहां नहीं हैं.. सो आपको तो लिखना ही होगा.. यही तो हमारी ड्यूटी है.." प्रशान्त ने कहा, "जब यही तुम्हारी ड्यूटी है तो यह ड्यूटी आज 20 दिनों के बाद याद आ रहा है?" बेचारे प्रशान्त को पता नहीं था कि यहां गार्ड कि कोई गलती नहीं थी.. यह सब तो रजिस्टर देवता का कोप था जो उसे भुगतना पर रहा था.. आगे प्रशान्त ने अपने बैठने कि जगह का पता और फोन नंबर देते हुये कहा, "मैं अभी नहीं लिख रहा हूं, जब तुम्हारे बॉस आ जायें तब मुझे फोन कर लेना.."

5 मिनट के बाद ही फोन आया, उसके बॉस ने कहा कि गार्ड कि गलती थी कि उसने पिछले 20 दिनों में एक बार भी नहीं रजिस्टर में लिखने को नहीं पूछा.. मगर आपको उसमें तो लिखना ही होगा..

अब तक वत्स प्रशान्त को रजिस्टर देवता कि महिमा का ज्ञान हो चुका था.. उस दिन से लगातार वह 5 दिनों तक रजिस्टर देवता का गुण गाया और हर दिन गार्ड के बिना पूछे ही खुद से मांग कर रजिस्टर में अपने चप्पल और कारण वाले भाग में "लेग फ्रैक्चर" के बारे में लिखता रहा..

अंततः एक दिन रजिस्टर देव खुश हुये और उन्होंने एडमिन वालों कि आंखें खोल दी.. उस दिन से एक नया नियम बन गया कि अगर किसी के साथ ऐसी दिक्कत हो तो वह एक ही बार में अपनी दिक्कत के बारे में ऑनलाईन इंट्रानेट वाले साईट पर इंटर कर दे..

इसी के साथ कथा समाप्त होती है.. तो सभी लोग एक साथ बोलें.. "रजिस्टर देवता कि?.......जय!!!!!"

12 comments:

  1. आखिर रजिस्टर देवता पिघल ही गए। रोचक लगी पोस्टिंग।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

    ReplyDelete
  2. जैसे प्रशान्त के दिन बहुरे वैसे ही सबके बहुरें।

    ReplyDelete
  3. जय हो.. शुक्र है तुम्हे इस देवता से मुक्ती मिली... हम तो हर रोज ऑफिस में आते जाते इस देवता के दर्शन करते है...

    ReplyDelete
  4. बोलो! हरे नमः, गोविन्द, माधव, हरे मुरारी .....

    ReplyDelete
  5. apne itna sara bak bak karte ho ham kabhi kuch bole hain tumko...ek to hamare register gaatha se uda kar itta lamba post likh maarte ho, aur kahte ho ki ham bak bak karte hain.
    ek to chori uspar seenajori...ulta chor kotwal ko daante :P

    waise kissa accha hai...isko kahte hain power of an inspirational writer...warna aisa kissa hamein kahan sunne ko milta, badhiya hai :D

    ReplyDelete
  6. दिलचस्प है यह...
    इसीलिए खुश होकर घोषणा करते हैं कि हमारा बकलमखुद जब भी छपेगा, इसी ब्लाग पर छपेगा।

    ReplyDelete
  7. धन्य हैं वे देवता जो प्रस्थित हुए.. :)

    ReplyDelete
  8. tumhari to is silsile mein tamaam kahaniyaan hongi :) :)

    ishq vishq mein isse koi fayda hua :)

    ReplyDelete
  9. सब भाई-बहन ज़ोर से बोलें,रजिस्टर देवता की जय्।

    ReplyDelete
  10. हा हा !
    वैसे हम तो भाई बचे हुए हैं रजिस्टर देव से. इनसे पाला पड़े वर्षों हो गए :)

    ReplyDelete
  11. मैं भी आपकी ही लाइन मैं हूँ | फिलहाल कंप्यूटर इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर रहा हूँ | मुझे मूवी मेकर से विडियो बनाना बहुत पसंद है | प्रोग्रामिंग भी अची कर लेता हूँ | 'C' लैंग्वेज में ९६% लेकर कॉलेज में टॉप आया था पिछले साल |
    मेरे विडियो यहाँ देखे -
    http://www.youtube.com/championindians
    मेरा ब्लॉग -
    http://sanjaydudani.blogspot.com/

    ReplyDelete