Thursday, July 16, 2009

बुखार और लूडो का रिश्ता

शरीर का तापमान सामान्य से अधिक होना, या फीवर, या फिर जिसे भदेष भाषा में बुखार भी कहते हैं.. बुखार और बचपन का बहुत नजदीक का रिश्ता होता है.. क्योंकि करने को हर तरह कि मनमानी करने की छूट होती है.. स्कूल जाना भी नहीं होता है.. और जब तक बुखार रहे तब तक पूरे घर के लोग हर तरह का नखरा उठाते रहते हैं..

कुछ-कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी था.. मेरे साथ तो एक बात और भी थी, मैं घर में सबसे छोटा था सो ऐसे ही मेरे नखरे सबसे ज्यादा हुआ करते ही थे.. मगर इन सबके साथ एक बात और भी खास हुआ करती थी.. लूडो!! जब कभी हम भाई-बहन में से कोई बीमार पड़ता था तब घर में एक नया लूडो जरूर आता था, जिसे हम सभी बच्चे खेल कर बहुत खुश होते थे..

पिछले रविवार से लगातार तीन दिन मैं बीमार था.. घर पर बात हुई.. मैंने पापा-मम्मी से शिकायत कि की उन्होंने मेरे लिये लूडो नहीं खरीद दिया..

- आपने मेरे लिये लूडो नहीं खरीद दिया..

- विकास, शिवेन्द्र में से किसी को कहो वो ला देगा..

- नहीं! आप खरीद दिजिये..

- ठीक है.. जब यहां आओगे तब खरीद देंगे..

- नहीं! अभी बुखार है तो अभी चाहिये..

तभी उन्हें याद आया कि जब वह यहां आये थे तब वे घर पर एक लूडो देखे थे.. गार्गी का था जो गार्गी के चेन्नई से जाने के बाद से हमारे पास ही रखा हुआ है.. उस लूडो को याद करके फिर से वे बोले

- तुम्हारे पास तो लूडो है.. उसी से खेलो..

- नहीं वो पुराना वाला लूडो है.. मुझे नया वाला चाहिये..

- अभी उसी से खेल लो..

- नहीं वो गार्गी का है.. मुझे मेरा वाला चाहिये..

अब तक उन्हें समझ में आ गया था कि ये नहीं मानने वाला है और वो लूडो भी नहीं खरीद सकते हैं.. सो बात यहीं खत्म हो गई..

फिलहाल ठीक-ठाक हूं और ऑफिस में हूं.. :)

15 टिप्पणी:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

मजा आ गया। इस उमर में बालहट। लगता है बुखार में उम्र कम हो जाती है।

विवेक सिंह said...

सच कहें तो हमने कभी लूडो खेला ही नहीं लिहाजा हमें इसका मज़ा भी नहीं पता !

Udan Tashtari said...

भूल भाल गये थे लूडो -आज याद आ गया.

रंजन said...

बारिश में भीगे थे क्या?

चलो पापा डाक से लुडो़ भेज देगें..:)

mehek said...

bachpan ki kuch suhani yaadein taza ho gayi.insaan kitna bhi bada ho,andar ka bachpan nahi marta.sunder post.

कुश said...

चलो अच्छा है अब सब ठीक है... कहो तो सात अगस्त को लूडो भिजवा दे..

poemsnpuja said...

bangalore aa rahe ho, ludo kharid kar rakhte hain...raampyari se dikha lo dobara bukhar aane ki himmat nahin karega

Anil Pusadkar said...

कुश दो लुडो लेना एक सात को पीडी को भेजना और दूसरा आठ को मुझे।लूडो खेलते समय गोटियां अंदर से बाहर करना और बाहर से अंदर करना,लड़ना-झगड़ना सब याद आ गया पीडी।बहुत बढिया।

डॉ .अनुराग said...

आजकल चार पांच गेम एक साथ मिलते है...हम अपने छोटू के साथ खेलते है .....किसी दिन ऑफिस में ले जाओ...देखे क्या धमाल होता है

महामंत्री - तस्लीम said...

Bahut khoob.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

जितेन्द़ भगत said...

लूडो की याद सही दि‍लवाई, पर भाई बुखार को भदेस भाषा का शब्‍द कहना ठीक नहीं। कि‍तना प्‍यारा शब्‍द है, कि‍तने आराम से अवकाश मि‍ल जाता है, लूडो भी
...
.
.:)

Creativity!! said...

bachpan ka kuch yaadein zindagi bhar apne saath hi rahega..bahut mazaa aaya.....Tabiyak ka khayal zaroor rakhiye :D

neelima sukhija arora said...

is umr mein baalhath, pd babu badhia hai

varsha said...

बुखार और लूडो? हम तो बस टीवी देखते हैं, या सोते रहते हैं! सच में, कभी बहुत काम करना पड़ता है तो लगता है काश बुखार हो जाए, आराम करने को मिले :)

दिगम्बर नासवा said...

haa haa loodo की याद करा दी आपने