Friday, May 21, 2010

एक गंजेरी की सूक्तियां

एक-

गँजेरी डरता है तूफ़ान से
तब
जब बची हो
सिर्फ एक तीली

और चलती हो
दिलों में आंधियां

दो-

धुवें में
बनती है शक्लें भी
बिगड़ती हैं शक्लें भी

यह कोई जेट प्लेन का धुवाँ नहीं
जो सीधी लकीर पे चले

तीन-

सिगरेट पीने वाले को गालियाँ
सिर्फ वही दे

जिसने नहीं पीया है
प्रदुषण का धुवाँ

चार-

सुना कि सिगरेट धीमा जहर है
धीरे-धीरे मारती है

जिंदगी और भी धीमा जहर है
यह बहुत दूर घेर के मारती है

पांच-

समाज के छुवाछूत को
इसी ने किया होगा
छिन्न-भिन्न सर्वप्रथम

जब एक सिगरेट को
दस लोगों ने बांटा होगा
साथ-साथ

छः-

पटना के गंजेरियों से
अलग नहीं है
दिल्ली का गंजेरी

छल्ले हर जगह एक से ही उड़ते हैं

सात-

जिन्हें नहीं चढ़ता है
नशा शराब से
वह पीता है धुवाँ भी

आखिर सब कुछ नशा ही तो नहीं होता

आठ-

लोग पूछते हैं
चाय के साथ
क्यों पीया जाता है सिगरेट
कोई अलग सुकून के लिए क्या

हम पूछते हैं
सुकून के लिए भी कोई
मुंह कड़वा करता है भला

नौ-

रात के तीन बजे
उठता है कोई

जलता है सिगरेट कोई
उठता है धुवाँ कहीं

दस-

सिगरेट जलाने वाले
जलते हैं खुद भी कहीं

एक आग सी लगती है कहीं
एक धुवाँ सा उठता है कहीं

यह पोस्ट "एक शराबी कि सूक्तियां" कि नक़ल भर है.. असली लुत्फ़ उठाना हो तो उधर जाए.. कसम धुवें और शराब कि, मजा आ जाएगा.. ;-) नजरें इधर भी इनायत करें.. :)

33 comments:

  1. क्या कमाल की सूक्तियां लिखते हैं आप पीडी साब.. माफ़ी चाहूँगा बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर आया आपके. अब नहीं भूलूंगा, ब्लोगरोल में डाल लेता हूँ.

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  2. bhai lage haathon hamara bhi link de dete to kya bura tha... aakhir pol toh tumne wahin kholi... star bloggar ho kuch hamara bhi vigyapan ho jata :)

    yeh to mazak tha.. bahut bahiya likha hai.. kahe ki daru, beedi yeh sab ke ham shuru se shaukeen rahe hain :)

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  3. bahut khub likhte hain aap...
    yun hi likhte rahein..
    regards
    http://i555.blogspot.com/

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  4. mere blog ki taraf bhi jaroor rukh karein....

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  5. @ सागर - स्टार ब्लोगर कि भूमिका निभाते हुए मैंने छोटे ब्लोगर(तुम्हारी) बात मान ली.. :P ही ही ही.. :)

    मजाक से इतर, भूल तो थी ही क्योंकि आज उस ब्लॉग पर तुम्हारे ही ब्लॉग से आज गया था.. तुम्हारा पता देना सच में भूल गए थे.. :(

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  6. मस्त सुक्तियाँ.

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  7. सुट्टे की सूक्ति ने तो ऐसी मस्ती वाली बात बतलाई की अब सोच रहे हैं एक आध सुट्टा हम भी मार ही लें....कहीं पछतावा न रह जाए

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  8. jay ho.. bahut mud mein ho.. lagtaa he..

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  9. कोशिश तो हमने भी की थी
    उसे नजदीक लाने की
    कमबख्त हम ही
    उसे पसंद न आए।

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  10. सिगरेट और धुँएं पर इतनी गहराई से आत्मचिन्तन लगता है कि कुछ चल रहा है तुम्हारे अंदर, जो तुम धुँएं में उडा रहे हो।

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  11. प्रशांत.... बहत सुंदर लिखा भाई....

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  12. भई मै तो सागर से ही इनप्र पहुचा था और कसम से सब एक से एक मारू :) तो सागर का भी शुक्रिया और तुम्हारा तो है ही.. :D

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  13. हा हा हा हा । धाँसू ।

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  14. मस्त :)
    नकल भी अकल लगा के मारी है...

    एक जगह अफीमची की जगह गंजेरी नहीं होना चाहिए? अफीमची भी धुँआ उड़ाता है क्या?

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  15. रवि जी के याद दिलाने पर सही कर लिया गया है. धन्यवाद रवि जी को. :)

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  16. जय हो १००८ श्री श्री बाबा श्री गंजेरी जी महाराज की ...जय हो...जय हो....

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  17. सुक्तियाँ तो मजे दार है जी इन गंजेरियो की. धन्यवाद

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  18. shandar, bhale hi nakal me banai lekin mast hai.
    aur han ek sharabi ki suktiyan to ultimate hai no doubt. kai bar apne dost ko padhwa chuka hu use

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  19. बढिया हैं. घर परिवार की बातें करते करते गांजे-भांग पर पहुंच गए ... खैरियत तो है?

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  20. बीड़ी जलई ले ...........

    जिगर मा बड़ी आग है

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  21. 22.05.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह 06 बजे) में शामिल करने के लिए इसका लिंक लिया है।
    http://chitthacharcha.blogspot.com/

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  22. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  23. बिंदास! तीसरी बार जब पढ़ा तो सोचा लिख ही दें ताकि सनद रहे।

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  24. सही!
    घुघूती बासूती

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  25. एक शराबी की सूक्तियां कई बार पढ़ चूका हूँ, गज़ब है पर जनाब आपने भी क्या धुंआ निकाला है...सुंदर पंक्तियों के लिए साधुवाद.

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  26. एक शराबी की सूक्तियां कई बार पढ़ चूका हूँ, गज़ब है पर जनाब आपने भी क्या धुंआ निकाला है...सुंदर पंक्तियों के लिए साधुवाद.

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  27. बेहतरीन , मगर आप दस का दम ले कर रुक गए । अभी बाकी है सिगरेट और दम भरिये

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  28. बेहतरीन , मगर आप दस का दम ले कर रुक गए । अभी बाकी है सिगरेट और दम भरिये

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