सब पीछे छोड़ कर मैं २ साल आगे निकल चूका था..जिंदगी कल फिर से मुझे घसीट कर वहीँ पहुंचा गई..ऐसा लग रहा है जैसे फिर से उसी मुकाम पर खडा हूँ जहां से शुरू किया था..ये जिंदगी भी अजीब होती है.. चिढा कर कहीं झुरमुठों में छुप सी जाती है..आज सुबह मैं बैगलोर से वापस लौटा और वहां G Vishwanath जी से भी मिला(और उनकी...
Monday, June 30, 2008
Thursday, June 26, 2008
अनाम मित्र के नाम पत्र
मेरे अनाम मित्र.. मैं ना तो कुछ साबित करना चाहता हूं और ना ही खुद को हीरो दिखाने कि कोई मंशा है.. मैं तो बस अपनी खुशी के लिये लिखता हूं और अगर कोई मेरी खुशी में खुश होना चाहता है तो उन्हें भी अपने साथ ले लेता हूं..जहां तक आपने लिखा है कि आपने कोई ऐसी बात नहीं लिखी जिससे आप हीरो दिख सकें और दूसरी तरफ...
Wednesday, June 25, 2008
Tuesday, June 24, 2008
Sunday, June 22, 2008
Friday, June 20, 2008
Thursday, June 19, 2008
I Got My First Promotion
पिछले एक सप्ताह से लगभग रोज ही मैं और मेरे कालेज कि मित्र मनस कभी एच.आर. तो कभी अपने पी.एल. से बोल रहे थे कि हमारे अप्रैजल का समय आ गया है तो हमें अभी तक अप्रैजल क्यों नहीं मिला है? एच.आर. वालों से तो मैंने लगभग झगड़ा तक कर लिया था कि जब आपको कोई काम समय पर चाहिये होता है तो हम खाना-सोना छोड़ कर बस काम...
Sunday, June 15, 2008
Friday, June 13, 2008
Thursday, June 12, 2008
Wednesday, June 11, 2008
Monday, June 09, 2008
Sunday, June 08, 2008
अन्दर नही जाऊंगा, अन्दर अमरीश पुरी सो रहा है
अन्दर नही जाऊंगा, अन्दर अमरीश पुरी सो रहा है.. ये मुझे मेरे पहले रूम मेट ने कहा था पहले सेमेस्टर मी.. जब वो मेरा रूम मेट बना था तब मैंने पहले दिन ही उसे साफ साफ बता दिया था की अगर तुम दारू पीते हो तो पियो, मगर मुझे अपने रूम मे नौटंकी नही चाहिए.. कम्प्यूटर पर जो करना है करो, मगर मेरी उपस्तिथि मे अपना...
Friday, June 06, 2008
खिंचाव! कुछ रिश्तों का और कुछ...!
मुझे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और बाईक्स का बहुत शौक है.. इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में भी अगर वो संगीत से जुड़ा हो तो फिर क्या कहना.. मेरे हाथ जो भी नया मोबाईल फोन या आई पॉड या फिर एक हेडफोन ही लग जाये, बस सबसे पहले यही देखता हूं कि इसे किस अधिकतम सीमा तक प्रयोग में लाया जा सकता है.. मेरे पास एक सोनी का ईयर फोन...
Thursday, June 05, 2008
Wednesday, June 04, 2008
मम्मी का रोना और मेरा ना रोना..
कल वट सावित्री पूजा थी.. रात में मुझे पता चला.. मैं रात में लगभग 10:20 में घर पहूंचा तब मम्मी ने फोन किया और मुझे ये पता चला कि आज वट साविती पूजा है.. मैं पूजा नहीं करता हूं.. पिछली बार भगवान के सामने कब हाथ जोड़ा था वो वर्ष भी अब याद नहीं है.. इस पूजा का महत्व मेरे लिये बहुत ज्यादा है, क्योंकि हम मम्मी...
Tuesday, June 03, 2008
मैं बदल गया हूं शायद
पिछले 2 साल में मेरे भीतर जितना परिवर्तन आया है वो परिवर्तन शायद उससे पहले के 24 सालों में भी नहीं आया था.. जिंदगी को करीब से देखने का मौका मिला.. दुनिया की अच्छाई-बुराई से परिचित हुआ.. काफी कुछ मिलने पर संघर्ष के रंगों को भी बदलते देखा और अपने आस-पास के लोगों को भी..एक क्षण में लोग कैसे अपनी बात से...