मेरे अनाम मित्र..
मैं ना तो कुछ साबित करना चाहता हूं और ना ही खुद को हीरो दिखाने कि कोई मंशा है.. मैं तो बस अपनी खुशी के लिये लिखता हूं और अगर कोई मेरी खुशी में खुश होना चाहता है तो उन्हें भी अपने साथ ले लेता हूं..
जहां तक आपने लिखा है कि आपने कोई ऐसी बात नहीं लिखी जिससे आप हीरो दिख सकें और दूसरी तरफ आपने उसका उत्तर भी दे दिया कि कोई और आपको हीरो कहे तो बात बने.. अब मेरे कुछ कहने की जरूरत ही नहीं है कि मैं वैसी कोई घटना क्यों नहीं लिखता हूं.. अपने जीवन में मैंने कुछ अच्छे काम भी किये हैं मगर उसे मैं अपने किसी करीबी मित्र से भी नहीं बांटता हूं फिर भला ब्लौग पर कैसे लिख दूं?
और हां मैं खुद को हीरो मानता ही नहीं हूं.. क्योंकि मुझे पता है कि मैंने अपने जीवन में कितने सही और कितने गलत काम किये हैं.. कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में शत-प्रतिशत कभी सही नहीं होता है.. मेरे करीबी जानते हैं कि मेरा जीवन एक खुली किताब जैसी है, जो मैंने अभी तक जिया है(सही या गलत) वो सभी के सामने है.. कुछ भी छुपा हुआ नहीं..
और रही बात कुपित होने कि तो मैं इतनी छूट तो अपने पाठकों को दे ही रखा है कि वो अनाम तत्व बन कर भी कमेंट कर सकें, मैंने तो मॉडेरेटर भी नहीं लगा रखा है.. सो मुझे इसके लिये तैयार रहना ही चाहिये कि कोई मेरी बुराई कर सके.. आज सुबह तो खुद मेरे पिताजी मेरे ब्लौग को लेकर बोल रहे थे कि आज-कल अच्छा नहीं लिख रहे हो.. हां, अगर किसी अनाम मित्र से अपशब्द मिले तो फिर ऐसा कुछ सोच सकता हूं, जो कम से कम अभी तक तो नहीं हुआ है.. वैसे अगर आप अपने नाम से भी कमेंट करते तो भी मैं आपको लेकर कोई पूर्वाग्रह नहीं बनाता..
जब मैंने हिंदी में ब्लौगिंग शुरू कि थी तब मैं यहां किसी को नहीं जानता था, लगभग एक साल बाद(सितम्बर 2007) मैंने पाया कि ढेर सारे लोग मेरे चिट्ठे पर अचानक से आने लग गये हैं, तब जाकर मैंने पाया कि नारद, ब्लौगवाणी और चिट्ठाजगत जैसे एग्रीगेटर ने मेरा रजिस्ट्रेसन खुद ही कर दिया है.. उसके बाद मैं हिंदी ब्लौग जगत से जुड़ा.. उससे पहले मैं अपनी खुशी के लिये लिखता था.. मैं जैसा पहले लिखता था वैसा ही आज भी लिखता हूं.. मतलब अपनी और अपनों खुशी के लिये..
30-40 लोगों कि बात अगर आप कर रहें हैं तो जब वे नहीं आते थे तब भी मैं लिखता था.. जब वे आने लगे तब भी मैं लिखता था.. जब 300-400 आने लगेंगे तब भी मैं वही कुछ लिखूंगा जो अभी लिखता हूं.. मेरे चिट्ठे का ही नाम है मेरी छोटी सी दुनिया.. मेरी दुनिया में जो कुछ भी घटता है बस उसी के लिये इस चिट्ठे पर जगह है.. दूसरी चीजों के लिये मेरे पास दूसरे चिट्ठे हैं..
धन्यवाद.
आज सुबह मुझे एक अमान मित्र का कमेंट मिला जिसका उत्तर लिखने बैठा तो पाया कि ये मेरे किसी एक पोस्ट से भी लंबा हो गया है तो मैंने इस पर एक पोस्ट ही बना डाली.. उनका कमेंट कुछ ऐसा था :
आप जो भी हो भाई मैं काफी दिनों से आपको नोटिस कर रहा हुं.
मेरा मतलब है मैं आपके ब्लौग पढ़ रहा हुं.
मैंने जो नोटिस किया है वो ये है कि आप वास्तविक जीवन में नहीं जी रहे हैं. वास्तविकता से आप काफी दूर हैं.
पता नहीं क्या साबित करना चाहते हैं आप अपनी बातों से.
भई साहब इस् तरह लिखने से हो सकता है आप 50-100 लोगों के बीच फेमस हो जायें.और हो सकता है आपकी मंशा भी यही हो. लेकिन जैसा आपने अपने सेल्फ़ इंट्रोडक्शन में लिखा है वैसा करें तो बात बने. षायद आप करते भी हों. हमे नहीं मालूम. बट आपने अभी तक ऐसा कुछ अपने ब्लौग पर नहीं शेयर किया. भाई साहब अपने आपको तो हीरो सभि मानते हैं. कोई अपने को बुरा नहीं मानता. मजा तो तब है जब दूसरे इस बात को माने. सॉरी अगर हमारी वजह से आप हर्ट हुए हों. लेकिन क्या करें हम अपना विचार व्यक्त करने से अपने आपको रोक नहीं पाये.
ये रोमण में हिंदी लिखा हुआ था जिसे मैंने देवनागरी में बदल कर लिख दिया..
अनाम मित्र को एक और वजह से धन्यवाद क्योंकि उनके कारण मैंने आज एक पोस्ट लिखा नहीं तो आज लिखने के मूड में नहीं था.. :)
मैं ना तो कुछ साबित करना चाहता हूं और ना ही खुद को हीरो दिखाने कि कोई मंशा है.. मैं तो बस अपनी खुशी के लिये लिखता हूं और अगर कोई मेरी खुशी में खुश होना चाहता है तो उन्हें भी अपने साथ ले लेता हूं..
जहां तक आपने लिखा है कि आपने कोई ऐसी बात नहीं लिखी जिससे आप हीरो दिख सकें और दूसरी तरफ आपने उसका उत्तर भी दे दिया कि कोई और आपको हीरो कहे तो बात बने.. अब मेरे कुछ कहने की जरूरत ही नहीं है कि मैं वैसी कोई घटना क्यों नहीं लिखता हूं.. अपने जीवन में मैंने कुछ अच्छे काम भी किये हैं मगर उसे मैं अपने किसी करीबी मित्र से भी नहीं बांटता हूं फिर भला ब्लौग पर कैसे लिख दूं?
और हां मैं खुद को हीरो मानता ही नहीं हूं.. क्योंकि मुझे पता है कि मैंने अपने जीवन में कितने सही और कितने गलत काम किये हैं.. कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में शत-प्रतिशत कभी सही नहीं होता है.. मेरे करीबी जानते हैं कि मेरा जीवन एक खुली किताब जैसी है, जो मैंने अभी तक जिया है(सही या गलत) वो सभी के सामने है.. कुछ भी छुपा हुआ नहीं..
और रही बात कुपित होने कि तो मैं इतनी छूट तो अपने पाठकों को दे ही रखा है कि वो अनाम तत्व बन कर भी कमेंट कर सकें, मैंने तो मॉडेरेटर भी नहीं लगा रखा है.. सो मुझे इसके लिये तैयार रहना ही चाहिये कि कोई मेरी बुराई कर सके.. आज सुबह तो खुद मेरे पिताजी मेरे ब्लौग को लेकर बोल रहे थे कि आज-कल अच्छा नहीं लिख रहे हो.. हां, अगर किसी अनाम मित्र से अपशब्द मिले तो फिर ऐसा कुछ सोच सकता हूं, जो कम से कम अभी तक तो नहीं हुआ है.. वैसे अगर आप अपने नाम से भी कमेंट करते तो भी मैं आपको लेकर कोई पूर्वाग्रह नहीं बनाता..
जब मैंने हिंदी में ब्लौगिंग शुरू कि थी तब मैं यहां किसी को नहीं जानता था, लगभग एक साल बाद(सितम्बर 2007) मैंने पाया कि ढेर सारे लोग मेरे चिट्ठे पर अचानक से आने लग गये हैं, तब जाकर मैंने पाया कि नारद, ब्लौगवाणी और चिट्ठाजगत जैसे एग्रीगेटर ने मेरा रजिस्ट्रेसन खुद ही कर दिया है.. उसके बाद मैं हिंदी ब्लौग जगत से जुड़ा.. उससे पहले मैं अपनी खुशी के लिये लिखता था.. मैं जैसा पहले लिखता था वैसा ही आज भी लिखता हूं.. मतलब अपनी और अपनों खुशी के लिये..
30-40 लोगों कि बात अगर आप कर रहें हैं तो जब वे नहीं आते थे तब भी मैं लिखता था.. जब वे आने लगे तब भी मैं लिखता था.. जब 300-400 आने लगेंगे तब भी मैं वही कुछ लिखूंगा जो अभी लिखता हूं.. मेरे चिट्ठे का ही नाम है मेरी छोटी सी दुनिया.. मेरी दुनिया में जो कुछ भी घटता है बस उसी के लिये इस चिट्ठे पर जगह है.. दूसरी चीजों के लिये मेरे पास दूसरे चिट्ठे हैं..
धन्यवाद.
आज सुबह मुझे एक अमान मित्र का कमेंट मिला जिसका उत्तर लिखने बैठा तो पाया कि ये मेरे किसी एक पोस्ट से भी लंबा हो गया है तो मैंने इस पर एक पोस्ट ही बना डाली.. उनका कमेंट कुछ ऐसा था :
आप जो भी हो भाई मैं काफी दिनों से आपको नोटिस कर रहा हुं.
मेरा मतलब है मैं आपके ब्लौग पढ़ रहा हुं.
मैंने जो नोटिस किया है वो ये है कि आप वास्तविक जीवन में नहीं जी रहे हैं. वास्तविकता से आप काफी दूर हैं.
पता नहीं क्या साबित करना चाहते हैं आप अपनी बातों से.
भई साहब इस् तरह लिखने से हो सकता है आप 50-100 लोगों के बीच फेमस हो जायें.और हो सकता है आपकी मंशा भी यही हो. लेकिन जैसा आपने अपने सेल्फ़ इंट्रोडक्शन में लिखा है वैसा करें तो बात बने. षायद आप करते भी हों. हमे नहीं मालूम. बट आपने अभी तक ऐसा कुछ अपने ब्लौग पर नहीं शेयर किया. भाई साहब अपने आपको तो हीरो सभि मानते हैं. कोई अपने को बुरा नहीं मानता. मजा तो तब है जब दूसरे इस बात को माने. सॉरी अगर हमारी वजह से आप हर्ट हुए हों. लेकिन क्या करें हम अपना विचार व्यक्त करने से अपने आपको रोक नहीं पाये.
ये रोमण में हिंदी लिखा हुआ था जिसे मैंने देवनागरी में बदल कर लिख दिया..
अनाम मित्र को एक और वजह से धन्यवाद क्योंकि उनके कारण मैंने आज एक पोस्ट लिखा नहीं तो आज लिखने के मूड में नहीं था.. :)