आज अनिता जी ने मेरे पिछले पोस्ट पर टिपियाया और पूछा कि कौन वाले आप हैं.. मेरा उत्तर है, मैं हूं डॉन.. अरे चौंकिये मत, ये नामांकरण तो मेरे एक मित्र नीता ने किया था और उसका साथ वाणी भी देती है.. नीता तो अब भी मुझे डॉन ही बुलाती है, वाणी अब बोलना छोड़ दी है.. वैसे मेरा डायलॉग डॉन वाले डायलॉग से कुछ अलग है..
"डॉन को पहचानना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है.."
अनिता जी ने प्रियंका को स्नेह देने के साथ लिखा था - बारिश में बाइक यात्रा, वाह हम तो सोच कर ही मजा ले रहे हैं। प्रियंका को खास स्नेह, इतनी तेज बाइक चलाने के लिए। हम तो कार इस स्पीड में दौड़ाते हैं, दुपहिया तो संभलती ही नहीं। रोड काफ़ी अच्छा लग रहा है। जनाब आप के ब्लोग पर जो आप का फ़ोटो लगा है और ये जो यात्रा वर्णन के फ़ोटोस हैं उसमें तो बहुत अलग लग रहे हैं। कौन से वाले आप हैं?…:)
मेरे कालेज में पढने वाली मेरी एक छोटी बहन अर्चना(कालेज में कभी उससे मिल नहीं सका था, मगर ब्लौग कि दुनिया में आकर उससे जान-पहचान हो गई..) ने भी एक बार यह प्रश्न पूछा था.. "भैया आपकी हर फोटो अलग सी क्यों लगता है?" मैंने उसे कहा था की मैं इस पर कभी विस्तार से लिखूंगा.. आज अनिता जी का कमेंट पढकर इस पर लिखने का मौका मिल गया..
आप इस चित्र को देखिये, मेरे विभिन्न रूप.. किसी भी रूप में मैं आपके सामने आ सकता हूं.. अगर मुझे पहचान सकते हैं तो पहचान लिजियेगा..

इसमे लाल रंग से जिस चित्र पर निशान बना हुआ है, मेरे उसी गेट-अप को देख कर नीता ने मेरा नाम डॉन रखा था..
कहिये आप क्या कहते हैं? :)
"डॉन को पहचानना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है.."
अनिता जी ने प्रियंका को स्नेह देने के साथ लिखा था - बारिश में बाइक यात्रा, वाह हम तो सोच कर ही मजा ले रहे हैं। प्रियंका को खास स्नेह, इतनी तेज बाइक चलाने के लिए। हम तो कार इस स्पीड में दौड़ाते हैं, दुपहिया तो संभलती ही नहीं। रोड काफ़ी अच्छा लग रहा है। जनाब आप के ब्लोग पर जो आप का फ़ोटो लगा है और ये जो यात्रा वर्णन के फ़ोटोस हैं उसमें तो बहुत अलग लग रहे हैं। कौन से वाले आप हैं?…:)
मेरे कालेज में पढने वाली मेरी एक छोटी बहन अर्चना(कालेज में कभी उससे मिल नहीं सका था, मगर ब्लौग कि दुनिया में आकर उससे जान-पहचान हो गई..) ने भी एक बार यह प्रश्न पूछा था.. "भैया आपकी हर फोटो अलग सी क्यों लगता है?" मैंने उसे कहा था की मैं इस पर कभी विस्तार से लिखूंगा.. आज अनिता जी का कमेंट पढकर इस पर लिखने का मौका मिल गया..
आप इस चित्र को देखिये, मेरे विभिन्न रूप.. किसी भी रूप में मैं आपके सामने आ सकता हूं.. अगर मुझे पहचान सकते हैं तो पहचान लिजियेगा..

इसमे लाल रंग से जिस चित्र पर निशान बना हुआ है, मेरे उसी गेट-अप को देख कर नीता ने मेरा नाम डॉन रखा था..
कहिये आप क्या कहते हैं? :)