उसके पास भी एक डायरी थी.. जिसे वह हर किसी से छुपा कर रखती थी.. जब वह कालेज जाती थी तब वह डायरी उसके कालेज बैग का एक हिस्सा होती थी.. और घर पहूंचने पर उसकी आलमीरा का एक हिस्सा.. अगर कालेज बैग साथ में ना हो तो उसके हाथों कि शोभा बढ़ाती थी वह डायरी.. जो भी उसे करीब से जानता था उसके लिये वह डायरी चंद्रकांता के तिलिस्म से कम नहीं होता था.. कालेज खत्म होने के बाद वही डायरी अक्सर उसके पर्स का एक हिस्सा बन जाया करती है.. साल दर साल बीतते जाते हैं, मगर उसकी डायरी कभी नहीं बदलती है.. हर दिन उसे उसी डायरी के साथ देखने की भी एक आदत सी हो जाती है..
- क्या है इस डायरी में?
- मैं नहीं बताऊंगी..
- मुझे भी नहीं बताओगी?
- नहीं..
- तुम तो कहती थी कि तुमसे कुछ भी नहीं छुपाती हूं मैं.. फिर इसे क्यों छुपा रही हो? क्या वो बातें भूल गई हो?
- नहीं यार! ऐसी कोई बात नहीं है.. कुछ छुपा नहीं रही हूं.. इसमें कुछ है ही नहीं..
- कुछ नहीं है तो मुझे दो देखने के लिये..
- नाह.. नहीं दे सकती..
- तो मैं छीन लूंगा..
- तुम नहीं छीन पाओगे..
- लो मैंने तुम्हारा बैग ले लिया.. इसी में वह डायरी है न?
- मेरा बैग मुझे दे दो..
- मुझे बैग से क्या लेना देना.. ये लो.. लेकीन डायरी ना दूंगा..
.......थोड़ी देर शांति........
- अरे यार!! इतना उदास क्यों हो रही हो? जाओ नहीं पढ़ता तुम्हारी डायरी.. मगर तुम्हे उदास नहीं देख सकता..
- दे दो ना मेरी डायरी.. प्लीज..
- लो.. मगर अब तो मुस्कुरा दो..
- मैं जानती थी कि तुम मुझे दे दोगे.. ये सब तो नाटक था.. डायरी वापस लेने का..
- सोचो, तुम्हे नाटक में भी उदास नहीं देख सकता.. सच में उदास हो जाओगी फिर मेरा क्या होगा?
- देखो आईसक्रीम वाला जा रहा है.. एक आईसक्रीम दिला दो ना..
- इतनी ठंढ में? नहीं.. आज नहीं..
- नहीं मुझे चाहिये.. दिला दो ना.. प्लीज..
- कितनी जिद्दी हो तुम.. चलो..
ऐसा क्यों अक्सर होता है! हर प्रेम करने वाली लड़की के पास एक डायरी होती है.. जिसे वह छिपा कर रखती है.. यहां तक कि अपने प्रेमी से भी.. क्या सच में उस डायरी में कुछ लिखा होता है? या फिर सिर्फ एक गल्प कथा बनाने के लिये ही वह डायरी उसके पास होती है? जिससे सभी को भरमाया जा सके..
- क्या है इस डायरी में?
- मैं नहीं बताऊंगी..
- मुझे भी नहीं बताओगी?
- नहीं..
- तुम तो कहती थी कि तुमसे कुछ भी नहीं छुपाती हूं मैं.. फिर इसे क्यों छुपा रही हो? क्या वो बातें भूल गई हो?
- नहीं यार! ऐसी कोई बात नहीं है.. कुछ छुपा नहीं रही हूं.. इसमें कुछ है ही नहीं..
- कुछ नहीं है तो मुझे दो देखने के लिये..
- नाह.. नहीं दे सकती..
- तो मैं छीन लूंगा..
- तुम नहीं छीन पाओगे..
- लो मैंने तुम्हारा बैग ले लिया.. इसी में वह डायरी है न?
- मेरा बैग मुझे दे दो..
- मुझे बैग से क्या लेना देना.. ये लो.. लेकीन डायरी ना दूंगा..
.......थोड़ी देर शांति........
- अरे यार!! इतना उदास क्यों हो रही हो? जाओ नहीं पढ़ता तुम्हारी डायरी.. मगर तुम्हे उदास नहीं देख सकता..
- दे दो ना मेरी डायरी.. प्लीज..
- लो.. मगर अब तो मुस्कुरा दो..
- मैं जानती थी कि तुम मुझे दे दोगे.. ये सब तो नाटक था.. डायरी वापस लेने का..
- सोचो, तुम्हे नाटक में भी उदास नहीं देख सकता.. सच में उदास हो जाओगी फिर मेरा क्या होगा?
- देखो आईसक्रीम वाला जा रहा है.. एक आईसक्रीम दिला दो ना..
- इतनी ठंढ में? नहीं.. आज नहीं..
- नहीं मुझे चाहिये.. दिला दो ना.. प्लीज..
- कितनी जिद्दी हो तुम.. चलो..
ऐसा क्यों अक्सर होता है! हर प्रेम करने वाली लड़की के पास एक डायरी होती है.. जिसे वह छिपा कर रखती है.. यहां तक कि अपने प्रेमी से भी.. क्या सच में उस डायरी में कुछ लिखा होता है? या फिर सिर्फ एक गल्प कथा बनाने के लिये ही वह डायरी उसके पास होती है? जिससे सभी को भरमाया जा सके..