अभी हफ्ते भर भी नहीं बीता है जब मेरा एक मित्र कम से कम छः महिने के लिये अधिकतम पता नहीं कितने समय के लिये ऑनसाईट के लिये ऊड़न-छू हो गया.. उसने इंगलैंड का रूख किया है.. मुझे जैसे ही पता चला की हमारे भाईजान(इनका नाम अफ़रोज है मगर हम दोस्तों के बीच यह भाईजान के नाम से ही प्रसिद्ध हैं) यू.के. की ओर रूख कर रहे हैं मैं तुरत-फुरत में उनसे अपना दुखड़ा लेकर बैठ गये..
मैंने कहा, "भाईजान! आपको पता नहीं है.. हम यहां गरीबी में किसी तरह दिन काट रहे हैं और उधर मेरा करोड़ों का माल यू.के. में अटका हुआ है.. अब तो मेरी सारी उम्मीद आप पर ही टिकी हुई है.."
"क्या हुआ भाई? पहले कभी इस बारे में चर्चा नहीं किये थे?" उनका उत्तर था..
"किस मुह से कहते? और बताने का कुछ फायदा भी तो नहीं था.. मगर अब जबकी आप यू.के. जा रहे हैं तो आपसे बहुत उम्मीदें हैं कि आप मेरा फंसा हुआ पैसा मुझे दिलवा सकते हैं.."
अब तक हमारे भाईजान की आंखें गोल-गोल होकर फैल चुकी थी और वह बहुत उत्सुकता से मेरी बात सुनने लगे थे..
"भाई क्या बताऊं, हर दिन कम से कम दो-तीन मेल मेरे इन्बॉक्स में तो आ ही जाता है कि आप 1 मिलियन पाउंड जीत गये हैं.. वो आता है यू.के.लॉटरी की तरफ से और मैं इतनी बड़ी रकम को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहता हूं सो इ-मेल पर उनसे बात करने में हिचकता हूं.. अब तुम यू.के. जा ही रहे हो तो जरा उसके बारे में भी पता करते आना.. तुम्हें बहुत दुवायें मिलेगी.."
अब मेरा इतना कहना था की वो लगा खीसें निपोरने.. "क्या भाई.. तुम भी बढ़िया मजाक कर लेते हो.." उसका इतना कहना था कि मैं समझ गया, वो इतनी आसानी से यह काम नहीं करने वाला है.. आखिर भारतीय ट्रेंड है कि किसी को भी खुश देख लो चलेगा मगर अपने खास दोस्तों के लिये तो हमेशा परेशानी ही पैदा करो.. थोड़ी धमकी भी दिया और थोड़ा दोस्ती की दुहाई देकर ईमोशनल अत्याचार भी किया.. साम-दाम-दंड-भेद, सभी अपना लिया उस पर.. उसे यहां तक कहा कि हर दिन जो मैं पैसे जीतता हूं उसमें 60% तुम्हारा..
अंत में जाने से पहले उसने कुछ कहा नहीं.. और हम तो कुछ नहीं का मतलब मूक सहमती ही समझते हैं.. सो अब इंतजार में बैठा हूं कि कब वह उसके बारे में पता करता है और कब मैं करोड़पति बनता हूं.. लेकिन जिस दिन करोड़पति बन गया मैं अपने ब्लौगर दोस्तों को भी नहीं भूलूंगा.. एक जबरदस्त पार्टी जरूर दूंगा.. सो अब आप लोग भी मेरे लिये उस पार्टी की खातिर दुवायें मांगना शुरू कर दिजिये.. ;)

इस चित्र को बड़ा करके देख सकते हैं यू.के. लॉटरी के बारे में..
मैंने कहा, "भाईजान! आपको पता नहीं है.. हम यहां गरीबी में किसी तरह दिन काट रहे हैं और उधर मेरा करोड़ों का माल यू.के. में अटका हुआ है.. अब तो मेरी सारी उम्मीद आप पर ही टिकी हुई है.."
"क्या हुआ भाई? पहले कभी इस बारे में चर्चा नहीं किये थे?" उनका उत्तर था..
"किस मुह से कहते? और बताने का कुछ फायदा भी तो नहीं था.. मगर अब जबकी आप यू.के. जा रहे हैं तो आपसे बहुत उम्मीदें हैं कि आप मेरा फंसा हुआ पैसा मुझे दिलवा सकते हैं.."
अब तक हमारे भाईजान की आंखें गोल-गोल होकर फैल चुकी थी और वह बहुत उत्सुकता से मेरी बात सुनने लगे थे..
"भाई क्या बताऊं, हर दिन कम से कम दो-तीन मेल मेरे इन्बॉक्स में तो आ ही जाता है कि आप 1 मिलियन पाउंड जीत गये हैं.. वो आता है यू.के.लॉटरी की तरफ से और मैं इतनी बड़ी रकम को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहता हूं सो इ-मेल पर उनसे बात करने में हिचकता हूं.. अब तुम यू.के. जा ही रहे हो तो जरा उसके बारे में भी पता करते आना.. तुम्हें बहुत दुवायें मिलेगी.."
अब मेरा इतना कहना था की वो लगा खीसें निपोरने.. "क्या भाई.. तुम भी बढ़िया मजाक कर लेते हो.." उसका इतना कहना था कि मैं समझ गया, वो इतनी आसानी से यह काम नहीं करने वाला है.. आखिर भारतीय ट्रेंड है कि किसी को भी खुश देख लो चलेगा मगर अपने खास दोस्तों के लिये तो हमेशा परेशानी ही पैदा करो.. थोड़ी धमकी भी दिया और थोड़ा दोस्ती की दुहाई देकर ईमोशनल अत्याचार भी किया.. साम-दाम-दंड-भेद, सभी अपना लिया उस पर.. उसे यहां तक कहा कि हर दिन जो मैं पैसे जीतता हूं उसमें 60% तुम्हारा..
अंत में जाने से पहले उसने कुछ कहा नहीं.. और हम तो कुछ नहीं का मतलब मूक सहमती ही समझते हैं.. सो अब इंतजार में बैठा हूं कि कब वह उसके बारे में पता करता है और कब मैं करोड़पति बनता हूं.. लेकिन जिस दिन करोड़पति बन गया मैं अपने ब्लौगर दोस्तों को भी नहीं भूलूंगा.. एक जबरदस्त पार्टी जरूर दूंगा.. सो अब आप लोग भी मेरे लिये उस पार्टी की खातिर दुवायें मांगना शुरू कर दिजिये.. ;)
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