Monday, November 23, 2009

क्या शीर्षक दूं, समझ में नहीं आ रहा है

अभी कल ही दो दिनों के ट्रिप से लौटा हूं.. येलगिरी नामक जगह पर गया था जो तमिलनाडु का एक हिल स्टेशन है.. अभी फिलहाल इन चार चित्रों को देखें, लिखने का मन किया तो वहां के भी किस्से सुनाऊंगा..








ये पिल्ला अपनी मां और भाई-बहनों को जाता देख रहा है..

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15 comments:

  1. तस्वीरें तो देख लीं, अब सफ़रनामा कब सुना रहे हैं?

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  2. रोचक चित्र हैं...किस्से भी बताएं...तो और मजा आएगा...
    नीरज

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  3. sunder chitra, pille wala bahut bhavuk bana gaya.kis soch mein duba hai wo?

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  4. पहला चित्र कहता है कि गरीबों के घर सब जगह एक से हैं, जीवन को इस से अधिक जरूरी नहीं।

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  5. bahut achhe hai..ye chitra..poore india me aise drishya aam hai..

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  6. अरे भाई कुछ लिखो भी.

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  7. शीर्षक.. "मस्त फोटू"

    टिप्पणी.."मस्त फोटू"

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  8. वाह प्रशांत ,
    भई फ़ोटुएं बता रही हैं कि खूब घुमाई हो रही है ..फ़ोटो देख के ही शांति और सकून सा मिल रहा है ..सफ़र नामा सुनने को बेकरार हैं

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  9. नाम में क्या रखा है.. चचा शेक्सपियर भी कह गये..what's in a name?

    वृत्तांत भी सुनाइये त्तो और मजा आये.

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  10. इस प्यार को क्या नाम दूं!

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  11. aji naam hona chahiye "yatra vrittant baad me likhunga."
    yah hai to hill station, lekin isme hill kahan hai?

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  12. zaroor kuch na kuch lekar aaye ho sath mein..

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  13. bahut aalsi ho gaye ho...kuch karne padega tumhara

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  14. दोबारा देखते हुए चमका...इसका तो एक ही शीर्षक हो सकता है "TANDELI" :D

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