Skip to content
मेरे ब्लौगवाणी वाले पोस्ट पर उड़न तस्तरी जी ने एक टिप्पणी दी जिसने मुझे वह पोस्ट हटाने के लिये प्रेरित किया और ये भी ख्याल आया कि आगे से पुनः इस तरह का काम नहीं करूंगा.. समीर जी को मैं धन्यवाद देना चाहूंगा जो मुझे विवादास्पद और सस्ती लोकप्रियता के मृगतृष्णा के चक्कर में परने से पहले ही वापस ले आये..
समीर जी का वो पत्र कुछ यूं था(जैसा कि अमूमन वो टिप्पणी में नहीं लिखते हैं:))..
इस तरह ट्रेफिक बुलवाकर आप ठीक नहीं करते वो भी तब, जब आप यूँ भी अपनी लेखनी से सबको आकर्षित करते हैं. मैं आपका हितचिंतक हूँ अतः आपके इस कदम से निराश हुआ हूँ और अफसोस जताने आया था. आशा है भावनाओं को समझते हुए आप इसे अन्यथा न लेंगे/ राह में विचलित करने वाले अनेकों लोग मिलेंगे, क्या सब राहों पर एक साथ चलना आपके लिये संभव होगा?? तब फिर?? यह रास्ता आपका नहीं है भाई..यह काठ की हांडी है, बस एक बार चढ़्ती है.
एक बार फिर से मैं समीर जी को धन्यवाद देता हूं और साथ में ये भी कहना चाहता हूं कि मैंने उसे अन्यथा ही नहीं दिल पर ले लिया :D(Just Kidding) :)..
एक रिकार्ड मेरे नाम भी : ये मेरे चिट्ठे का पहला ऐसा पोस्ट है जिसे मैंने हटाया है..
Related Posts:
एक बीता हुआ कलआज-कल ना जाने क्यों अकेलेपन का एहसास कुछ अधिक ही बढ गया है। कहीं भी जाऊं बस खुद को भीड़ में अकेला महसूस करता हूं। मुझे चेन्नई में दो जगहें बहुत अधिक पस… Read More
कवि का निर्माण (व्यंग्य)मैंने अक्सर लोगों को और अपने दोस्तों को कहते सुना है कि जब किसी का दिल इश्क़ में टूटता है तो वो कवि बन जाता है और कवितायें लिखने लगता है। मेरी भाभी मुझ… Read More
"सामर्थ्य और सीमा" के कुछ अंश'टन-टन-टन' घड़ी ने तीन बजाये और चौंककर मेजर नाहरसिंह ने अपनी आंखें खोल दीं। अब मेजर नाहरसिंह को अनुभव हुआ कि रात के तीन बज गये हैं। दिन निकलने में कुल … Read More
भाषा का ज्ञान और भाषा की समझमेरी समझ में भाषा का ज्ञान और भाषा की समझ दोनों में बहुत अंतर है। मेरी मातृभाषा हिंदी है जिसे मैं बचपन से बोलता आया हूं और मुझे इस भाषा से बहुत प्रेम … Read More
दो विपरीत अनुभवपहला अनुभवमैं चेन्नई में जहां रहता हूं वहां से कार्यालय जाने वाले रास्ते में 'बस' में बहुत ज्यादा भीड़ होती है। उस भीड़ का एक नजारा आप भी इस तस्वीर में … Read More
प्रशांत आप ने बहुत अच्छा किया,फ़िर हम लोग तुम्हे ओर बाकी तुम्हारी उम्र वालो को अपने बच्चो की तरह से मानते हे,शायाद समीर जी ने इसी हक से तुम्हे समझाया हे,ओर आप ने यह कर के हम सब की नजर मे अपनी इज्जत ओर बढा ली हे,
ReplyDeleteउम्मीद है अब आप अपनी कलम की ताकत से 'ट्राफिक' बुलाएँगे न की भूल वश की गयी गलती को दोहरा कर
ReplyDeleteआपके इस व्यवहार ने आपके व्यक्तित्त्व को चार चाँद लगा दिए. आशीर्वाद और ढेरों शुभकामनाएँ
ReplyDeleteमीनाक्षी
अच्छा किया।
ReplyDeleteमैं इस चिट्ठी को फायरफॉक्स, पर लिनेक्स में, देख रहा हूं। आपका यह टेंप्लेट एकदम ठीक दिखायी पड़ रहा है। वैसे यह कौन सा टेंप्लेट है।
ReplyDeleteजिस भावना से मैने कहा, उसी भावना से आपने मेरी बात ग्रहण की. मैने आपको ऐसा ही समझा था और आपके प्रति मेरे मन में आपका स्थान और ऊँचा हो गया.
ReplyDeleteमेहनत करते रहिये, हम सब दिल लगाकर आपको पढ़ते हैं. हाँ, कई बार टिप्पणी करना रह जाता है तो उससे आप जैसे अच्छे लेखकों को क्या फरक पड़ना चाहिये.
अनेकों शुभकामनायें एवं आभार.
ठीक किया। पर नजर जल्दी उतारो।
ReplyDelete'काठ की हाँड़ी' की बात का ध्यान दिलाया समीरजी ने , भला किया।
ReplyDelete