Thursday, November 27, 2008

मेरे अपने सब ठीक हैं मुंबई में, और मैं खुश


"बरसात बहुत जोर से हो रही है.. न्यूज में पढ़ा था कि पूरे तमिलनाडु में 30 के लगभग लोग मर गये हैं.." बाईक चलाते हुये उसने मुझसे कहा.. मैं पीछे बैठा हुआ था..

ट्रैफिक बहुत था और चारों ओर घुटने से थोड़ा कम ही पानी जमा हुआ था.. लोग बिना शोर किये, हार्न बजाये बिना बस चुपचाप खड़े ट्रैफिक के ख्त्म होने का इंतजार कर रहे थे.. एक भाईसाहब बाईक पर ही इत्मिनान से छतरी खोल कर बैठे हुये थे.. जैसे उन्हें पता हो कि अगले 10-15 मिनट तक ट्रैफिक नहीं खुलने वाला हो..

"हां.." मैंने बात आगे बढ़ाते हुये कहा.. इस ट्रैफिक के कारण बात करने का मौका मिल गया था.. "3-4 दिनों से खूब बरसात हो रही है.. वैसे आपने आज कि खबर पढ़ी?" मैंने उड़ता हुआ सवाल उनकी ओर फेका..

"हां.. जो भी हुआ अच्छा नहीं हुआ.." पल भर को चिंता उनके चेहरे पर दिखने लगी जो क्षण भर में ही गायब हो गयी.. थोड़ी खुशी के साथ आगे उन्होंने कहा "एक अच्छी बात यह है कि मेरे जान पहचान में से मुंबई में कोई भी नहीं है.. सो मैं निश्चिंत हूं.. वैसे भी चेन्नई में बम नहीं फूटता है कभी.."

"क्यों? चेन्नई में क्यों नहीं फूटता?" मैंने अगला सवाल किया..

"देखो मैं तमिलनाडु का ही रहने वाला हूं, मैं यहां के लोगों को अच्छे से जानता हूं.. यहां के अधिकतर लोग तमिल को धर्म से भी ऊपर रखते हैं.. उनके लिये पहले मैं तमिल हूं फिर जाकर हिंदू या मुसलमान.. तमिल होना उनका पहला धर्म है, तब जाकर कुछ और.." इतने दिनों से यहां रहते हुये मैं भी अब यह समझने लगा हूं.. मुझे उनकी बातों में सच्चाई लगी..

ट्रैफिक खुल चुकी थी और वो बाईक चलाने में व्यस्त हो चुके थे.. मैं भी सोचने लगा था.. "कल रात मैंने भी क्या किया? अपने सभी जान-पहचान के लोगों कि खबर ले ली और सुबह ऑफिस जाना है सोचकर चैन से सो गया, सोचा कि होगी कोई छोटी सी घटना और ऐसी घटना तो रोज ही घटती है.. एक भैया जो कोलावा में नेवी क्वाटर में रहते हैं, कुछ कालेज के दोस्त और ब्लौग जगत के मित्र.. सभी कुशल से हैं, और मैं भी निश्चिन्त.. क्या हम सभी के लिये ये आम घटना नहीं थी.. आज जिसे देखो उसका खून खौल रहा है इस पर.. 10 दिनों बाद न्यूज चैनलों के लिये ये कोई खबर भी नहीं रहेगी.. फिर आने वाले चुनाव में इसे खूब भुनाया जायेगा.. आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलने लगेगा.. जो आतंकवादी पकड़ा गया है उसका धर्म देखा जायेगा.. 10 साल बाद जब कोर्ट उसे मौत कि सजा सुनायेगी तब कुछ बेहद गिरे हुये नेता उसके बचाव में आ खड़े होंगे, उस पर भी राजनीति करेगें.. इस बीच कुछ और बम धमाके.. कुछ और आतंकवादी हमला.. बस हम और हमारे लोग ठीक हैं, हम इसी गुमान में जीते रहेंगे.."

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9 comments:

  1. दिनोंदिन यह आतंक हमारे पास आता जा रहा है । अब किसी भी दिन किसी के भी दरवाजे पर दस्तक देगा । अब यह समाचार से अधिक हो गया है । केवल आंकड़ें नहीं रह गया ।
    घुघूती बासूती

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  2. pata nahi bhaiyya kya hoga?? abhi tak chal raha hai. shayad shanti nahi hogi... kalyug.... kalyug.. kalyug aur usmein hum bhi papi..... sarkar aisi chunte hain

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  3. हार्दिक श्रद्धांजली मेरे उन शहीद भाईयो के लिये जो हमारी ओर हमारे देश की आबरु की रक्षा करते शहीद हो गये।लेकिन मन मै नफ़रत ओर गुस्सा अपनी निकाम्मी सरकार के लिये

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  4. 10 दिनों के बाद चैनल भूल जाएंगे, इसे या लायब्रेरी में रखेंगे संदर्भ के लिए। लेकिन क्या आप भी भूल जाएंगे?
    हम क्यों नहीं समझते कि यह हमारे विरुद्ध युद्ध है और हम सभी ड्यूटी पर हैं। आप खुद इस अवस्था में आएँ और अपने मित्रों को इस के लिए तैयार करें।

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  5. हां यही हक़िकत है। हम हर बात को सबसे पहले खूद से जोड कर देखते हैं।

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  6. बुद्धिमानी का लेख है। सहमत।

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  7. bahut sahi kaha aapne sehmat hai.

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