Friday, August 08, 2008

Deleted Post

पंगेबाज जी की सलाह पर ये पोस्ट हटाया जा रहा है..

Related Posts:

  • दर्द रूकता नहीं एक पल भीयह महरूम नुसरत फ़तेह अली खान का गाया एक कव्वाली है.. मुझे यह नेट पर पॉडकास्ट करने के लिये कहीं मिला नहीं, मगर मैं जल्द ही इसे अपलोड करके पॉडकास्ट कर दू… Read More
  • पापाजी से संबंधित कुछ और बातेंउस दिन जब पापाजी घर वापस आये तब मैं, भैया और पाहूनजी (जीजाजी) तीनों तुरत नीचे पहूंच गये उनका स्वागत करने के लिये.. कुछ-कुछ सुबह का माहौल भी ऐसा ही कुछ… Read More
  • पिताजी द्वारा किया गया आभार संबोधनकल मेरे पापाजी रिटायर हो गये। अपने जीवन के पूरे 33 साल किसी नौकरी को देने के बाद उसे अचानक से छोड़कर चले जाना कैसे होता है यह उन्हीं से पूछिये जिनके स… Read More
  • क्या आपने मेरा ढोल देखा है?क्या आपने मेरा ढोल देखा है? क्या कहा, नहीं देखा है? तो आज देख लें, बाद में ये मत कहें कि केशू ने अपना ढोल भी नहीं दिखाया.. अभी देखने का सबसे बड़ा फायदा… Read More
  • देने वाला जब भी देता पूरा छप्पड़ फाड़ कर देतायह पोस्ट चिट्ठा चर्चा के फीड से संबंधित है..मैं आजकल जो भी ब्लौग पढ़ता हूं वह सारे गूगल रीडर के माध्यम से ही पढ़ता हूं.. ऐसा नहीं है कि मैं कुछ पुराने औ… Read More

7 comments:

  1. अब कुछ कहने के लिए बचता ही कहां है।

    ReplyDelete
  2. सलाह मानने के लिये धन्यवाद के पात्र है आप साधुवाद के भी :)

    ReplyDelete
  3. nahi ji.. thank you to ham aapko kahte hain.. :)

    ReplyDelete
  4. हम तो चूक गये-देख ही नहीं पाते. :(

    ReplyDelete
  5. हम भी चूक गए। कुछ शरीफ लोगों के लिए ईमेल सर्विस चला लीजिए न !!!!
    :)

    ReplyDelete