आज कोई भी माई का लाल ऐसा नहीं कह सकता है कि उसने हमे हिंदी ब्लौगिंग सिखाई.. अगर कोई है तो आये, हम भी ताल ठोके तैयार बैठे हैं.. हद है यार.. यहां ब्लौग को चिट्ठा किसने कहा? नामवर जी को क्यों बुलाया? जैसे व्यर्थ प्रश्न में ही अपना दिमाग खराब किये हुये हैं.. हम तो यहां आलोक जी से लेकर नामवर जी तक, सभी का...
Wednesday, October 28, 2009
Tuesday, October 20, 2009
लंद-फंद देवानंद बतिया रहे हैं, पढ़ने का मन हो तभिये पढ़ियेगा
गूरू लोग अपन गूरूपनी झाड़ले चलते हैं कि बेटा खूब मेहनत करो.. बड़का औफिसर बनोगे.. पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे त होगे खराब.. एक्को गो नसिहत काम नहीं आता है.. दोस्त लोग के साथ लंद-फंद देवानंद बतियईते चलते हैं.. अबकी इंटरभ्यू में ई सब पुछिस थी ऊ एच.आर. अऊर टेक्निकल बला राऊंड तक त पहुंचबो नहीं किये.....
Monday, October 19, 2009
दिवाली की रात मेरे घर में भूतों का हंगामा
इसमें मैं यह नहीं लिखूंगा की दिवाली की रात हमने कैसे दिये जलाये? क्या-क्या पकाया? और कितने पटाखे जलाये.. ये सब तो लगभग सभी किये होंगे.. मगर दिवाली कि रात कुछ हटकर अलग सा कुछ हो तभी तो मजा है, और वो भी अनायास हो तो सोने पे सुहागा.. तो चलिये सीधे किस्से पर आते हैं..दिवाली मनाने के बाद हम सभी मित्र खाना...
Friday, October 16, 2009
Tuesday, October 13, 2009
एक बीमार की बक-बक
मेरे ख्याल से बीमार आदमी या तो बेबात का बकबकिया हो जाया करता है या फिर चुपचाप अपने में सिमटा रहता है और यह समय भी बीत जायेगा जैसे ख्यालों में रहता है.. जब तक घर में था तब जब कभी पापाजी बीमार पड़ते थे, उनके मुख से अनवरत कविता-कहानियों का निकलना चालू हो जाता था.. एक से बढ़कर एक कविता-कहानी.. किसी आशु कवि...
Monday, October 12, 2009
ईश्वर बाबू
आज यूं ही अपने ई-मेल के इनबाक्स के पुराने मेल पढ़ते हुये कुछ कवितायें हाथ लगी, जिसे मैं यहां पोस्ट कर रहा हूं.. मुझे नहीं पता यह किसकी लिखी हुई है, मगर जिनकी भी है अगर उन्हें इस कविता के यहां पोस्ट करने से आपत्ति है तो कृप्या एक कमेंट अथवा ई-मेल के द्वारा सूचित करें.. तत्पश्चात इसे यहां से हटा लिया जायेगा..ईश्वर...
Thursday, October 01, 2009
ब्लौगर हलकान सिंह 'विद्रोही' का चेन्नई आगमन
अब क्या कहें, ये हलकान सिंह विद्रोही आजकल जहां देखो वहीं दिख जाते हैं.. पहले कलकत्ता में शिव जी के साथ मटरगस्ती कर रहे थे.. फिर कानपूर में अनूप जी को कथा कहानी सुनाने लगे.. अब जब वह चेन्नई आये थे तब उन्होंने मुझे बताया कि एक दिन वे भटकते हुये मेरे पुराने पोस्ट पढ़ने लगे.. देखा कि यह तो अमूमन जिस किसी...