Monday, March 30, 2009

यादों के काफिले में जुड़ा एक और कारवां

थोड़ी देर के लिये मैं अपनी यादों के फ्लैश बैक में चला गया था.. लगभग 13-14 साल पहले.. चक्रधरपुर के मेले में पापा के साथ घूम रहा हूं और पापा से जिद कर रहा हूं.. "पापा मुझे बैलून फोड़ना है..""बैलून से खेलते हैं, उसे फोड़ते थोड़े...

Friday, March 27, 2009

खट्टी खीर उर्फ़ तईर सादम का रहस्य (बनाने की विधि के साथ)

वैधानिक चेतावनी - कल वाले पोस्ट के वैधानिक चेतावनी को आप मजाक में ले सकते हैं, मगर आज वाले व्यंजन बनाने के बाद उसे चखने का खतरा आप अपने ऊपर ही लें.. मेरे ऊपर कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है..(सच्ची बहुत खतरनाक है..) इस पोस्ट...

Tuesday, March 24, 2009

मीठी खिचड़ी का रहस्य(बनाने की विधि के साथ)

वैधानिक चेतावनी - इस पोस्ट को पढ़कर मीठी खिचड़ी अपनी जिम्मेदारी पर बनायें.. मेरी कोई जिम्मेदारी उस खिचड़ी पर नहीं बनेगी.. हां विधि पढ़कर चाहे जितनी गालियां आप मुझे दे सकते हैं.. ;)होली के दिन मैं दिनभर घर में अकेले ही था.. एक...

Monday, March 23, 2009

प्रोफेशनल लाईफ के (अन)प्रोफेशनल लोग (अंतिम भाग)

जैसा कि मैं अपने पिछले पोस्ट में बता चुका हूं की मैं अभी जिस प्रोजेक्ट में काम कर रहा हूं उसमें शुरूवात में अनेकानेक परेशानियों का सामना करना पड़ा था.. कुछ लोग ने मेरी परेशानियों को बढ़ाने का भी काम किया तो कुछ ने उसे सुलझाने में भी मदद की.. मुझे सबसे ज्यादा मदद मिली फनिन्द्र नामक अपने सहकर्मी से..वह...

Wednesday, March 18, 2009

वडनेकर जी, आपका नंबर क्या है?

कल रात अचानक से अजित वडनेकर जी की एक चिट्ठी अपने ईनबॉक्स में आया हुआ देखा.. शीर्षक कुछ "दुखद समाचार" करके था.. पढ़कर दिल घबराया, कि अचानक से क्या हो गया.. डरते-डरते कांपते हाथों से लिफाफा फाड़े और चिट्ठी निकाल कर पढ़े.. मगर पढ़कर दिल खुश हो गया.. वो कहते हैं ना, एक रोता है तो दस हंसते हैं.. अब क्यों हंसते...

Saturday, March 14, 2009

और लवली का जन्मदिन आकर चला गया

11 मार्च को होली थी, और मुझे यह भी याद था की कल यानी 12 मार्च को लवली का जन्मदिन है.. नहीं-नहीं मुझे उस समय सिर्फ इतना ही याद था की कल लवली का जन्मदिन है.. क्योंकि अगले दिन भी मेरे दिमाग में बस इतना ही घूम रहा था की कल लवली का जन्मदिन है(मुझे अभी समझ में नहीं आ रहा है की मैं यहां मुस्कुराता हुआ स्माईली...

Tuesday, March 10, 2009

यादों के रंग के साथ एक होली अलग सी

सुबह उठा और अपने पांचवे तल्ले वाले घर की बाल्कनी नीचे झांका.. बेतरतीबी से गाड़ियां भागी जा रही थी, जैसे सभी फारमूला वन में भाग ले रहे हों.. धीरे धीरे गाड़ियों का शोर थमता चला गया और फिर बिलकुल बंद हो गया.. नीचे देखा तो पाया कि चार भाई-बहन आपस में ही होली खेल रहे हैं.. उनके साथ होली खेलने वाला कोई और जो...

Sunday, March 08, 2009

प्रोफेशनल लाईफ के (अन)प्रोफेशनल लोग

चारों तरफ होली की हुड़दंग मची हुई है तो कहीं जोगीरा सारारारा की धूम.. मगर मेरे लिये यह दोस्तों के घर जाने की खुशी और विभिन्न ब्लौग में आने वाले पोस्ट तक ही सिमट कर रह गई है.. मेरे दिलो-दिमाग पर आज कल सिर्फ और सिर्फ ऑफिस ही...

Wednesday, March 04, 2009

टूटे टांग का दर्द

मेरे पिछले पोस्ट में आपने पढ़ा होगा की किस तरह एक छोटी सी दुर्घटना में मेरे पैरों में हल्का सा सूजन आ गया था.. अगर नहीं पढ़े हैं तो यह लिंक रहा..कई दोस्तों की सलाह मान कर मैंने डाक्टर से भी दिखा लिया और एक्स रे भी करा लिया.. मगर अफ़सोस के साथ कहना पर रहा है कि मेरे सारे पैसे बरबाद हो गये.. ये भी भला कोई...

Sunday, March 01, 2009

घर जाने की छटपटाहट

शुक्रवार को ऑफिस पहूंचा.. मेरा बांया पैर पूरी तरह से सूज कर फुला हुआ था, काफी दर्द भी था.. ऑफिस में सभी मुझसे बोल रहे थे कि आज ऑफिस आने की क्या जरूरत थी? आज छुट्टी ले लेते और घर पर ही आराम करते.. दोस्तों ने पूछा तो मैंने...