Monday, September 29, 2008

कुछ बदनाम गीत जो खूब सुने गये(सुट्टा सांग)

लोग उन्हें बदनाम गीत मानते हैं, मगर किसी कालेज के होस्टल में जाकर देखिये तो पता चलेगा कि कैसे ये बदनाम गीत अच्छे-अच्छे गीतों का बैंड बजा रहे हैं.. अब इसे किसने गाया है, किसने लिखा है और संगीत संपादक कौन है मुझे पता नहीं है.. आप अगर इसके बोल पर ना जाकर बस संगीत और गिटार के धुनों को सुनेंगे तो आपका मन...

Sunday, September 28, 2008

उड़नतस्तरी पर टिपिया कर मुसीबत ना पालें

कुछ दिन पहले मैंने समीर जी के ब्लौग, उड़नतस्तरी पर सबसे पहले टिपियाने वालों में से था.. टिपियाने को तो मैंने टिपिया दिया, मगर ऐसी मुसिबत पाल ली कि अब सोचता हूं कि आगे से ना टिपियाऊं.. और अगर टिपियाऊं भी तो आगे से आने वाले...

रोमांटिक होकर ब्लौग लिखना और टिपियाना

जरा भविष्य में झांकते हुये कल्पना किजिये, प्रशान्त कि शादी हो चुकी है और वो बहुत ही रोमांटिक मूड में बैठा अपनी बीबी से बातें कर रहा होता है.. उनकी बीबी भी बहुत ही रोमांटिक मूड में थी.. अचानक.. जी हां.. अचानक प्रशान्त उठते हैं और अपने कंप्यूटर ऑन कर कोई रोमांटिक सा कोई पोस्ट या फिर कविता लिख डालते हैं.....

Thursday, September 25, 2008

किया है प्यार जिसे, हमने जिंदगी की तरह

कहीं कुछ मन नहीं लग रहा था.. रात बहुत हो चली थी.. एक कश मारने कि इच्छा बहुत हो रही थी.. मगर नहीं मारा.. शायद घर में होता तो लगा भी लिया होता.. मगर ना लगाऊं इस कारण से रखता ही नहीं हूं घर में.. मोबाईल उठा कर देखा.. कुछ मैसेज दोस्तों को फॉरवार्ड भी किये.. मेरे कई दोस्तों को लगता होगा कि बहुत मैसेज भेजता...

Wednesday, September 24, 2008

शिव जी कि खुशी का राज

आजकल शिव जी बहुत खुश दिखाई दे रहे हैं.. आखिर हो भी क्यों ना? घर में लैंड लाईन कनेक्शन जो लग गया है.. अरे भाई, माना की यह कनेक्शन बी.एस.एन.एल. का नहीं है, एयरटेल का है.. पर क्या हुआ, आखिर है तो लैंडलाईन ही ना.. अब बिहार के...

Sunday, September 21, 2008

अनिता जी! मुझको पहचान ना पायेंगी आप, मैं हूं डॉन

आज अनिता जी ने मेरे पिछले पोस्ट पर टिपियाया और पूछा कि कौन वाले आप हैं.. मेरा उत्तर है, मैं हूं डॉन.. अरे चौंकिये मत, ये नामांकरण तो मेरे एक मित्र नीता ने किया था और उसका साथ वाणी भी देती है.. नीता तो अब भी मुझे डॉन ही बुलाती...

Saturday, September 20, 2008

चेन्नई-वेल्लोर बाईक ट्रिप(विकास द्वारा)

जैसे कि वेल्लोर जाने का हम लोगों का पहले से प्रोग्राम था.. चन्दन के पापा-मम्मी और चन्दन से भी मिलने.. बहुत दिन हो गए थे मोटे से मिले हुए.. पहले ये प्रोग्राम शनिवार को बन रहा था लेकिन चन्दन उस दिन CMC में व्यस्त रहता इसलिए...

Thursday, September 18, 2008

अनुभव के साथ कूपमंडुकता भी आती है

बहुत पहले मेरे बॉस ने मुझे कहा था की, "Experiance brings stupidity." वो उस समय अपनी तुलना मुझसे कर रहे थे.. उन्होंने कहा था कि अनुभव के साथ सोचने की दिशा ही बदल जाती है.. लोग सोचने लगते हैं कि जैसा उनके साथ हुआ था वही सही है, भले ही वो सबसे ज्यादा गलत हो.. ये कुछ ऐसा ही है जैसे कोई अंधविश्वास.. किसी...

Tuesday, September 16, 2008

अजी नाम में ही तो सब कुछ है

शेक्सपीयर का लिखा हुआ और धीरे-धीरे लोकोक्ति में बदल चुक यह वाक्य कि, नाम में क्या रखा है.. मगर मजे की बात तो यह है कि जब उसने लिखा था तब उसके नीचे अपना नाम भी लिख ही दिया जिससे सभी ये जाने की इसे किसने लिखा है.. मेरा तो...

Sunday, September 14, 2008

सच में मम्मी, कहां फंसा दी

कुछ दिन पहले मैंने अपने एक पोस्ट में अपने भतीजे के जन्म पर एक पोस्ट लिखा था की क्या मम्मी कहां फंसा दी.. वो पोस्ट बस एक मजाक भर में लिखा हुआ था.. खुशियों से भरा हुआ.. मगर कभी-कभी सच में लगता है की क्या मम्मी कहां फंसा दी जन्म देकर.. हर दिन एक नयी चुनौती का सामना करना पड़ता है.. नये अंतर्द्वंद सामने आते...

Thursday, September 11, 2008

Saturday, September 06, 2008

एक नरसंहार के बाद दूसरे भीषण नरसंहार की तैयारी

जैसा की सुशांत झा जी का एक लेख मैंने मोहल्ला पर पढा था की ये बाढ नहीं नरसंहार है.. बिहार में आये बाढ को मैं भी नरसंहार की संज्ञा देना ज्यादा उचित समझता हूं.. राष्ट्र के कर्ता-धर्ता, राज्य प्रसाशन, जिला प्रसाशन.. सभी जानते...

Friday, September 05, 2008

छुट्टियों में मुझे व्यथित करने वाले कुछ अहम प्रश्न

अभी कुछ दिनों पहले मैं छुट्टियों में घर गया हुआ था.. अगर आप मेरा चिट्ठा पढते होंगे तो आपको पता होगा की कुछ खुशियां मेरे परिवार में आयी है.. घर में हर दिन, हर तरफ उत्सव सा ही माहौल था.. मगर इन सबके बीच कुछ प्रश्न मुझे लगातार...