Monday, May 26, 2008

अमवा के पेड़वा पर झुलुआ झुलैया के याद आवेला

अमवा के पेड़वा पर झुलुआ झुलैया के याद आवेला,
गरमी के दिनवा में नानी के गऊँआ के याद आवेला।।

धूल भरल ट्रेफिक में गऊँआ के टमटम के याद आवेला,
आफिस के खिचखिच में मस्ती भरल दिनवा के याद आवेला।
दोस्तन के झूठिया देख माई से झूठिया बोलल याद आवेला,
प्रदूषण भरल पनिया देख तलवा तलैया के याद आवेला।।
गरमी के दिनवा में.......।।

ब्रेड बटर के देखत ही मकुनी अऊर चोखा के याद आवेला,
कोल्ड ड्रिंक के केलोरी में छाछ और पन्ना के याद आवेला।
फास्ट फूडन के दुनिया में सतुआ-चबेना के याद आवेला,
अश्लील भईल सिनेमा से कठपुतली के नचवा के याद आवेला।।
गरमी के दिनवा में.......।।

बीबी के होटल बाजी से माई के खनवा के याद आवेला,
मतलबी पटीदारन में जानवर के वफादारी के ञाद आवेला।
दारुबाजन के हुड़दंगई में भंगिया के मस्ती के याद आवेला,
पुलिसियन के रौब देख रावण अहिरावण के याद आवेला।।
गरमी के दिनवा में.......।।

भ्रष्टाचारी के मनसा देख सुरसा के मुँहवा के याद आवेला,
नेताजी के करनी से गिरगिटया के रंग बदलल याद आवेला।
बेईमान भरल दुनिया में आपन बेईमानी के याद आवेला,
ना होए पुनर्जन्म अब तऽ बस अंतिम समइया के याद आवेला।।
गरमी के दिनवा में.


ना जाने कहां से मुझे ये मिला था.. ना जाने किसका लिखा हुआ है.. अगर आप में से किसी को पता हो तो बताना ना भूलें.. आज जब मैं अपने जी-मेल के ड्राफ्ट को देख रहा था तो वहीं मैंने इसे देखा.. मुझे लगा कि आप लोगों को भी ये पढ़ना चाहिये.. सो यहां पोस्ट कर रहा हूं..

Related Posts:

  • कोई नॄप होए, हमें का हानीवर्ल्ड कप 20-20 से भारत बाहर हो चुका है, और अभी आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है.. वैसे इसमें कुछ भी अजूबा नहीं है, ऐसा तो हमेशा ही होता है.. जब भी बा… Read More
  • आई टी प्रोफेशन के साईड इफेक्टसाईड इफेक्ट 1 -पिछले शुक्रवार की बात है.. मैं दिन भर ऑफिस में काम करने के बाद रात वाले शो में सिनेमा देखने कि भी तैयारी थी.. रात आठ बजे मैं अपने ऑफिस … Read More
  • एक चीयर गर्ल हमें भी चाहिये, आईटी वालों की पीड़ाएक चीयर गर्ल हमें भी चाहिये.. जब भी कोई डिफेक्ट फिक्स हुआ, तो वह नाचे.. हम सभी को चीयर करे.. हिंदी सिनेमा में अक्सर सुनता आया हूं, कि जिंदगी एक खेल के… Read More
  • लाईफ, जैसे कोई चैट बॉक्सआज से लगभग एक साल पहले का यह चैट हिस्ट्री आप लोगों के सामने रख रहा हूं.. जिससे आप यह समझ सकेंगे कि ऑफिस में खाली समय में या फिर थोड़ी देर के ब्रेक में … Read More
  • फादर्स डे के बहाने कुछ मेरी बातें- मैं इन सब बातों को नहीं मानता हूं.. अब भला यह भी कोई बात हुई कि कोई दिन फिक्स कर दिया जाये कि इसी दिन आप मां-बाप को याद करें?- फिर तो तुम्हें नया सा… Read More

6 comments:

  1. इधर बारिश हो रही उधर आप आम ठेल रहे है.....जिसने भी लिखी है बड़ा फल प्रेमी है.....

    ReplyDelete
  2. अच्छी कविता है - नये पुराने का प्रॉपर घालमेल!

    ReplyDelete
  3. एक दर्द और चुभन लिए हुए अच्छी और सुंदर कविता.

    ReplyDelete
  4. आपको इतान कुछ एक साथ याद आ रहा है, मुझे तो सिर्फ याद आ रहा है मेरा नानी घर। पन्द्रह साल तक गर्मी की छुट्टियां हमने वहीं बितायी है।

    ReplyDelete
  5. जिसने भी लिखी है, बड़ा दिल लगा के लिखी है. आभार आपने इसे हम सबके साथ बांटा.

    ReplyDelete
  6. अच्छी कविता....इधर मुंबई तो आम ही आम हैं...

    ReplyDelete