Tuesday, July 31, 2007

कुछ बिखरे पन्ने

कल शाम मैं अपनी पुरानी डायरीयों को पलट रहा था, तो मुझे कुछ पुरानी यादों ने घेर लिया। मैं यहां उन्ही यादों और उस डायरी के पन्नों की चर्चा करने जा रहा हूं। जनवरी, सन २००२। कड़ाके कि सर्दी पर रही थी। मेरे पापा उस समय गोपालगंज में थे सो मैं भी उनके साथ वहाँ गया हुआ था। उन दिनों मैं चाय नहीं पीता था पर...

Monday, July 30, 2007

'प्यासा' एक नजर

कल मैंने फिर से प्यासा देखी, ये एक ऐसी फ़िल्म है जिसे मैं जितनी बार देखता हूं उतनी बार एक बार और देखने का जी चाहता है। मेरा ऐसा मानना है कि अगर कोई भी डायरेक्टर अपने जीवन में इस तरह का फ़िल्म बनाता है तो फिर उसे कोई और फ़िल्म...

Monday, July 23, 2007

भैया और भाभी

मेरी प्यारी सी दुनिया - भाग २समय है भैया और भाभी की चर्चा करने की। सबसे पहले तो मैं इन दोनों को ढेर सारी शुभकामनाए देने के साथ आप लोगों को ये बताना चाहूंगा कि ये दोनों अभी-अभी २२ जून को शादी के बंधन में बंधे हैं।हां तो सबसे पहले मैं अपने प्यारे भैया के बारे में बताना चाहूंगा कि ये मेरे बहुत ही अच्छे...

Friday, July 20, 2007

मेरी प्यारी सी दुनिया

मुझे आज ये विचार आया कि ये मेरी छोटी सी दुनिया तो है मगर ये मेरी दुनिया का प्रतिबिम्ब नहीं है, क्योंकि अभी तक मेरे परिवार और मित्रो के लिये जगह नहीं बनी है. तो क्यों ना इसे मैं आज संपूर्ण बना ही दूं? शुरूवात करता हूं उनसे...

Monday, July 02, 2007

बचपन की याद

आज मेरी एक मित्र ने मुझे ये कुछ पंक्तियां ईपत्र के द्वारा भेजा तो बचपन कि कुछ याद ताजा हो गयी और सोचा की क्यों ना आप लोगों को भी वापस बचपन में लौटने का मौका दूं। सो मैं ये पत्र यहां भेज रहा हूँ। वंदना जी को पत्र भेजने के...