Tuesday, October 15, 2013

बाथे नरसंहार के ठीक बाद

जिस रात यह घटना घटी उससे एक दिन बाद ही मुझे PMCH के इमरजेंसी वार्ड में एक डाक्टर से मिलना तय हुआ था. सोलह-सत्रह साल की उम्र थी मेरी. सुबह जब PMCH के लिए निकला था तब तक मुझे इस घटना की जानकारी नहीं हुई थी. अस्पताल पहुँच कर मुझे पता था की इमरजेंसी वार्ड में किस डाक्टर से और कहाँ मिलना है. मगर वहां पहुँच कर एक डर सा मन में बैठ गया. हर तरफ सैकड़ों की संख्या में पुलिस थी. पुलिस से मुझे कभी वैसा भय नहीं रहा है जैसा भय आम जनों के बीच घुला मिला है. कारण शायद यह हो सकता है की घर में पापा की नौकरी की वजह से पुलिस का आना-जाना और उनकी सुरक्षा व्यवस्था में लगी पुलिस का होना. मगर वहां इतनी अधिक पुलिस देख कर मन में भय समां गया. फिर भी हिम्मत करके इमरजेंसी वार्ड के दरवाजे पर गया तो पाया की वहां दरवाजे पर भी भारी सुरक्षा व्यवस्था थी. और किसी को भी अंदर नहीं जाने दे रही थी. मैं किसी तरह उन डाक्टर का नाम लेकर और कुछ और बहाने बना कर अंदर जा घुसा. मेरे साथ आये पापा के स्टाफ को पुलिस ने अंदर नहीं जाने दिया. शायद मैं लगभग बच्चा ही था इसलिए मुझे जाने दिया हो. अंदर पहुँचते ही सबसे पहले हॉल आता है, वहीं कम से कम तीस-चालीस लाशें रखी हुई थी. मुझमें आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं थी फिर भी यह सोच कर की जब यहाँ आया ही हूँ तो उस डाक्टर से मिल ही लूँ, और उनके कमरे की तरफ आगे बढ़ गया. उनके कमरे की तरफ जाते हुए कई लोग बिस्तर पर बेसुध हुए दिखे जो जिन्दा तो थे, मगर गोलियों से छलनी, और इलाज के लिए अपनी बारी का इन्तजार कर रहे थे. शायद इतने लोगों का एक साथ इलाज संभव नहीं रहा हो उस वक़्त. आगे बढ़ने की हिम्मत भी टूट चुकी थी. किसी तरह बाहर वापस आया और घर चला गया. मगर कई सालों तक वह भयावह दृश्य आँखों के सामने घूमता रहा.

अभी जिस दिन सभी अपराधियों को हाईकोर्ट द्वारा बरी करने की खबर आई थी तो यह सब आँखों के सामने घूम गया. साथ ही यह भी भरोसा हो चला की उन्हें किसी ने गोली नहीं मारी. वे तो आसमान से बरसती गोलियों के शिकार हुए थे. उनका हत्यारा कोई नहीं.


Related Posts:

  • कुछ और किस्से केशू केहो सकता है कि आज के जमाने में किसी को यह अतिश्योक्ति लगे, मगर हमारे घर में अभी तक यह लगभग किसी नियम के तहत चलता आ रहा है कि रात में सोने से पहले माता-… Read More
  • कहाँ जाईयेगा सsर? - भाग ३दिनांक २३-११-२०११ सबसे पहले - मैंने गिने-चुने लोगों को ही बताया था कि मैं घर, पटना जा रहा हूँ.. घर वालों के लिए पूरी तरह सरप्राईज विजिट.. अब आगे - … Read More
  • यह लठंतपना शायद कुछ शहरों की ही बपौती है - भाग २जब कभी भी इन रास्तों से सफ़र करने का मौका मिला हर दफ़े एक अजब सा लठंतपने को देखने का मौका भी मिला, मगर उसी लठंतपना का ही असर बाकी है जो मुझे पटना की ओ… Read More
  • एक सफ़र और जिंदगी में - भाग १दिनांक २३-११-२०११ अभी चेन्नई से दिल्ली जाने वाली हवाई जहाज में बैठा ये सोच रहा हूँ की दस महीने होने को आये हैं घर गए हुए और आज जाकर वह मौका मिला है … Read More
  • सबकी अपनी-अपनी माया!!!लग रहा है जैसे घर भाँय भाँय कर रहा है। दिन भर घर में एक उत्पात जैसा मचाये रखने वाला लड़का!! भैया की शादी के समय वह लखनऊ में थे, और इधर शादी हुई और भैय… Read More

4 comments:

  1. घायलो में बचे तो केवल 7 ही व्यक्ति थे.। 58 मारे गए थे जिन में 5 मछुआरे थे।

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी. शायद कई मृत को भी घायल कह कर वहां रख छोड़ा गया था, जिन्हें मैंने देखा था.

      Delete
  2. रोंगटे खडे कर देने वाला अनुभव । सोचता हूं कि जब विश्व में ऐसी खबरें जाती होंगी तो वे इस देश की न्याय व्यवस्था के बारे में क्या सोचते होंगे

    ReplyDelete
  3. आत्मा काँप जाती होगी यह दृश्य देख कर।

    ReplyDelete