पिछले एक-दो सालों से तुलना करने पर ब्लॉग पर लिखना आजकल बहुत कम हो गया है.. एक तरह से मेरे लिए इसका स्थान फेसबुक ने ले लिया है.. वहाँ ब्लॉग की तुलना में लोगों से वार्तालाप भी बेहद आसान है, और मेरे लिए किसी माइक्रो ब्लोगिंग...
Wednesday, March 30, 2011
Thursday, March 24, 2011
एक थी महुआ घटवारन
वो जो महुआ घटवारन का घाट है न, उसी मुलुक की थी महुआ! थी तो घटवारन मगर सौ सतवंती में एक! उसका बाप दिन-दिहाड़े ताड़ी पीकर बेहोश पड़ा रहता था, उसकी सौतेली माँ थी साक्षात राक्षसनी.. महुआ कुंवारी थी, हरी-पुरी दुनिया में कोई ना था उसका!
दुनिया बनाने वाले,क्या तेरे मन में समाई, तुने,काहे को दुनिया बनाई, तुने,काहे...
Monday, March 14, 2011
Tuesday, March 01, 2011
हरी अनंत, हरी कथा अनंता
यूँ तो अब तक के जीवन में कई लोग मिले हैं, मगर उनमें भी अपने यह भाईसाब अनोखे किस्म के ही हैं.. नाम जानना जरूरी नहीं, आज तो बस उनके कुछ किस्सों का लुत्फ़ उठाया जाए..होस्टल के दिन थे.. यूँ तो मैं कई दफ़े अकेले रहा था या फिर घर से दूर सिर्फ लड़कों के संगत में रह चुका था फिर भी होस्टल में रहने का अपना पहला...