Tuesday, May 28, 2013

ज्वलंत समय में लिखना प्रेम कविता

1. जब देश उबल रहा था माओवादी हिंसा एवं आदिवासियों पर हुए अत्याचार पर मैं सोच रहा था कि लिखूँ एक नितांत प्रेम में डूबी कविता!! 2. बुद्धिजीवियों के विमर्श का शीर्ष बिंदू जब थी सामाजिक समस्याएँ तब मैं सोच रहा था लिखूँ कुछ ऐसा जो छू ले तुम्हारे अंतर्मन को 3. तथाकथित बुद्धिजीवी जब लगे थे इस जुगत में की...

Friday, May 17, 2013

बयार परिवर्तन की

बिहार की राजनीति में रैलियों का हमेशा से महत्व रहा है और अधिकांश रैलियों में सत्ता+पैसा का घिनौना नाच एवं गरीबी का मजाक भी होता रहा. इस बार आया "परिवर्तन रैली". आईये जानते हैं कि परिवर्तन किसे कहते हैं? १. लालू-नितीश ने...