Thursday, April 29, 2010

दो बजिया बैराग्य पार्ट फोर

मैंने कभी भी पापाजी को गुस्से में चीखते-चिल्लाते नहीं देखा है.. वह भी एक आम इंसान हैं, और किसी और कि तरह गुस्साते भी हैं.. मगर घर में उनके गुस्से को ऊँची आवाज कभी नहीं मिली.. उनका चुप रह जाना ही अपने आप में सब कह जाता था.....

Tuesday, April 27, 2010

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है?

कल मैंने एक दफ़े फिर से यह सिनेमा देखी, और इस पुरानी पोस्ट को फिर से ठेल दिया। पहली बार जब मैंने यह लिखा था तब शायद ही कोई मेरे ब्लॉग को पढता था, शायद अबकी कोई पढ़ ले। :)कल मैंने फिर से प्यासा देखी, ये एक ऐसी फ़िल्म है जिसे...

Saturday, April 17, 2010

दो बजिया वैराग्य पार्ट थ्री

कल दीदी का फोन आया, तक़रीबन रात साढ़े दस बजे के आस पास.. अक्सर जब भी फोन करती है तो उसका समय दस से ग्यारह के बीच ही होता है.. बहुत खुश होकर फोन कि थी और सिर्फ एक सूचना देकर एक मिनट से भी कम समय में फोन रख दी.. बोली कि मैंने...

Thursday, April 15, 2010

इंडिया सर ये चीज धुरंधर

किसी ने सच ही कहा है, कि अंग्रेजी में अक्सर अपशब्द डाल्यूट हो जाया करते हैं.. अपनी तीव्रता नहीं बनाये रख पाते हैं.. कुछ ऐसा ही फौलोवर शब्द के साथ भी है.. शब्दकोश.कॉम पर फौलोवर शब्द के तरह-तरह के मतलब दे रखे हैं.. मसलन - अनुगामी, अनुयायी, शिष्य, अनुसरणकर्ता, अधीन चेला, आगे दिया हुआ.. मेरी समझ में इसी...

Tuesday, April 06, 2010

मां रेवा तोरा पानी निर्मल, खलखल बहतो जायो रे!!

अभी कुछ दिनों पहले रविश जी ने फेसबुक पर "इंडियन ओशन" के एक गीत "मां रेवा" का जिक्र करते हुये कहा था "मां रेवा...तेरा पानी निर्मल..कल कल बहतो जाए...इंडियन ओशन का जब यह गाना सुनता हूं तो मां रेवा हलक के भीतर उतरने लगती है।...

Sunday, April 04, 2010

दो बजिया वैराग्य पार्ट टू

घर से कई किताबें लाया हूँ जिनमे अधिकतर फणीश्वरनाथ रेणु जी कि हैं.. उनकी कहानियों का एक संकलन आज ही पढ़ कर खत्म किया हूँ, 'अच्छे आदमी'.. पूरी किताब खत्म करने के बाद फुरसत में बैठा चेन्नई सेन्ट्रल रेलवे स्टेशन पर अपने मित्र...