Thursday, April 30, 2009

कम से कम बधाई तो दे ही सकते हैं आप

मैंने घर जाने का प्लान बहुत दिनों से बना रखा था, जिसे बाद में कुछ कार्यालय संबंधी व्यस्तताओं कि वजह से स्थगित कर दिया.. अगर घर जाना होता तो अभी मैं बैठकर पोस्ट नहीं लिख रहा होता, बल्की अभी मैं दिल्ली में होता और शाम में पटना कि ट्रेन पकड़ने कि जुगत में लगा होता.. शायद शाम में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर...

Monday, April 27, 2009

बारिश

कई दिनों से बारिश नहीं हुई..मन रीता सा लगता है..अगर बारिश हो जाये तोअपनी यादों को अच्छे से खंघालूं..जो पुरानी यादें हैं उसे धो डालूं..और रख दूं सूखने धूप में..तब तक उसे सुखाता रहूं,जब तक पुरानी यादों का दर्द उड़ ना जाये..आखिर...

Saturday, April 25, 2009

बेटा मन में लड्डू फूटा (पार्ट दो)

एक दिन "एक्स डियो" का एड देखा.. मन को बहुत भाया.. बस एक बार डियो लगाओ और सारी लड़कियां मेरे पीछे भागेगी.. मैंने प्रचार में देखा भी था कि एक्स डियो थोड़ा सा नहीं लगाया जाता है.. उसे तो ऐसे लगाते हुये दिखाता है जैसे उसी से नहा रहा हो.. मैंने भी तुरत जाकर एक एक्स डियो खरीदा.. पानी और साबुन से रगड़-रगड़ कर...

Thursday, April 23, 2009

अथ श्री बेटा मन में लड्डू फूटा कथा (पार्ट एक)

मैं चकाचक सफेद टी-शर्ट के ऊपर नीले रंग का जींस चढ़ा कर क्रिकेट खेलने के लिये मैंदान में पहूंचा था.. अंततः मेरा दोस्त आऊट हुआ और मेरी बैटिंग आ ही गई.. मेरे भीतर पूरा आत्मविश्वास था और पहली ही गेंद पर सिक्सर लगा दिया.. अरे...

Wednesday, April 22, 2009

टुकड़ों में बंटा पोस्ट

पहला टुकड़ा -आज मेरे पापा-मम्मी कि बत्तीसवीं शादी कि सालगिरह है.. घर कि याद भी बहुत आ रही है..दुसरा टुकड़ा -कल ऑफिस में मुझे कुछ बहुत जरूरी काम है मगर ऑफिस आना बहुत मुश्किल लग रहा है.. आखिर कल तमिलनाडु बंद है.. अगर कल नहीं आया तो मुझे शनिवार को ऑफिस आना पड़ेगा, जो मैं नहीं चाह रहा हूं..तीसरा टुकड़ा -मैंने...

Sunday, April 19, 2009

मेरे बेटूलाल का पहला कदम

मेरा बेटूलाल अब बिना किसी कि सहायता के सरकना सीख लिया है.. अभी कुछ दिन पहले मेरे पापा-मम्मी यहाँ चेन्नई मेरे पास आये हुए थे और इसी बीच मेरा बेटूलाल(भैया का बेटा शाश्वत प्रियदर्शी) ने बिस्तर के बाहर अपना कदम फैलाना शुरू कर दिया.. यहाँ एक वीडियो भैया ने उपलोड किया है जिसे मैं यहाँ पोस्ट कर रहा हूँ.....

Saturday, April 18, 2009

अथ हिंदीभाषी कथा इन चेन्नई भाग दो

मेरा पिछला पोस्ट पढ़कर मेरे अधिकतर मित्रों ने कमेंट के द्वारा रोष ही प्रकट किया है.. चाहे वह तमिल या किसी अन्य प्रादेशिक भाषा को लेकर हो या फिर लोग किसी प्रदेश में जाकर भी वहां कि भाषा-संस्कृति को लेकर अपना सम्मान नहीं दिखाते हैं उसे लेकर..पहला कमेंट ही कुछ ऐसा था जो PN Subramanian जी ने लिखा था, "रोचक...

Friday, April 17, 2009

अथ हिंदीभाषी कथा इन चेन्नई

पिछली कथा पढ़कर घुघुती जी ने मुझसे यह उम्मीद जतायी कि मैं जल्द ही यहां हिंदी बोलने के ऊपर कि कोई कथा लेकर आऊंगा, तो लिजिये हाजिर हूं.. इसके कयी छोटे-छोटे अध्याय हैं और सभी अद्याय अपने आप में संपूर्ण.. तो चलिये आपको यहां कि भाष के साथ अपने और अपने मित्रों के कुछ हिंदी से जुड़े दिलचस्प और कड़वे अनुभव सुनाता...

Wednesday, April 15, 2009

अथ टैक्सी चालक कथा

अध्याय एक : स्थान - लखनऊ के आस-पास(कौन सा हिस्सा मुझे पता नहीं.. ;))मास - फरवरी, 2009मेरे पापाजी किसी वर्कशॉप में वहां गये हुये थे.. वहां उन्होंने टैक्सी किया और उससे टैक्सी के किराये के बारे में पूछने पर उसने कहा कि साहब आप यहां आये हैं तो आपसे किराया लूंगा थोड़े ही ना? यह कह कर उसने जबरदस्ती किराया...

Monday, April 13, 2009

ताऊ का तोता हिरामन या पोपटलाल?

कुछ साल पहले कि बात है.. कौन बनेगा करोड़पति बिलकुल सुपर-डुपर हिट टीवी का प्रोग्राम था.. ताऊ के घर में भी बहुत प्रसिद्ध था यह.. ताऊ, ताई, सैम, बीनू-फिरंगी, हिरामन, रामप्यारी.. सभी साथ बैठकर कौन बनेगा करोड़पति देखा करते थे और...

Thursday, April 09, 2009

करोड़पति बनने का ऊपाय नंबर टू

अभी हफ्ते भर भी नहीं बीता है जब मेरा एक मित्र कम से कम छः महिने के लिये अधिकतम पता नहीं कितने समय के लिये ऑनसाईट के लिये ऊड़न-छू हो गया.. उसने इंगलैंड का रूख किया है.. मुझे जैसे ही पता चला की हमारे भाईजान(इनका नाम अफ़रोज है...

Tuesday, April 07, 2009

कड़ोड़पति बनने की ओर अग्रसर

अभी हाल फिलहाल में दो ऐसी घटना घटी है जिससे मुझे अब ऐसा लगने लगा है कि मैं जल्द ही कड़ोड़पति बनने जा रहा हूं और वो भी अपने इस जीमेल और ब्लौग के कारण.. चलिये मैं अपनी बात आपके सामने सिलसिलेवार ढ़ंग से रखता हूं..1. अभी कुछ दिन...

Friday, April 03, 2009

उसका यूं ही चले जाना किसी मौत से कम नहीं था

वो कब इस जीवन में आयी और कब चली गई कुछ पता ही नहीं चला.. ऐसा लगता है जैसे जीवन के पांच साल यूं ही हवा में उड़ गये.. जीवन के सबसे खुशनुमा पांच साल.. उसकी कमी आज भी खलती है.. मन उदास भी होता है.. उसके वापस आने की कल्पना भी...

Wednesday, April 01, 2009

अप्रैल फूल नहीं बना रहा हूं, सच्ची में टांग टूट गया :(

अप्रैल फूल नहीं बना रहा हूं, सच्ची में टांग टूट गया.. एक फ्रैक्चर पैर के कानी अंगुलीवाली हड्डी में हो गया.. शनिवार की रात एक ऑटो वाले ने ठोंक दिया और हो गया मेरा पैर शहीद.. मेरे दोस्तों और मेरा भला चाहने वाले भी खुश.. वाह!! फिर से मौका मिला है अपना शोक अदा करने का.. तो चलिये पूरी घटना जरा विस्तार से...