Wednesday, December 31, 2008

साल भर के ब्लौग पोस्ट और ब्लौगरों का कच्चा-चिट्ठा

इस साल मैंने कुल 296 लेख विभिन्न ब्लौग पर लिखे.. जिसमें से 227 पोस्ट मैंने मेरी छोटी सी दुनिया पर लिखी, 12 पोस्ट अपने तकनिकी चिट्ठे पर लिखी, 4 पोस्ट भड़ास के लिये लिखा, 1 पोस्ट मोहल्ला के लिये लिखा, 1 पोस्ट रेडियोनामा के...

बड़ी शक्ति के साथ जिम्मेदारियां भी बड़ी हो जाती है

मैंने किसी चलताउ अंग्रेजी सिनेमा में एक डायलॉग सुना था, "बड़ी शक्ति के साथ जिम्मेदारियां भी बड़ी हो जाती है" जो मुझे बहुत सही भी लगा था.. मेरे पिछले लेख में मैंने जो कुछ भी लिखा वो सब एक जाने-माने साहित्यकार के बारे में लिखा था ना कि किसी साधारण व्यक्ति के बारे में.. हम हर दिन ना जाने कितने ही कानूनों...

Tuesday, December 30, 2008

क्या यादव जी के चुरट सुलगाने को भी जायज कहेंगे आप?

हिन्द युग्म के वार्षिक उत्सव में क्या हुआ और क्या नहीं वो तो मुझे पता नहीं.. दिल्ली में नहीं हूं तो इस तरह के आयोजन मेरे लिये खबरों का एक हिस्सा ही बन कर रह गये हैं.. मगर मैं शायद दिल्ली में होता तो भी वहां नहीं जाता.. कारण ऐसी गोष्ठीयों से दूर रहने कि प्रकृति.. उन्होंने जो कुछ भी कहा उस पर मुझ जैसे...

क्या महिलायें आतंकवादी नहीं होती हैं?

जैसा कि मैंने अपने पिछले पोस्ट में बताया था कि मुंबई हमले के बाद से मेरी कंपनी में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है.. मेटल डिटेक्टर भी उसी सुरक्षा व्यवस्था का ही एक हिस्सा है.. जब मैं ऑफिस के अंदर घुसता हूं तो सबसे पहले मेरा बैग चेक किया जाता है.. फिर मेटल डिटेक्टर से मेरी जेबों को चेक किया जाता है.....

Monday, December 29, 2008

एक तमंचे कि जरूरत है, नहीं तो नौकरी पर खतरा

हर दिन ऑफिस आने से पहले दिल में एक धुकधुकी सी लगी रहती है कि आज जाने क्या होगा? आज ऑफिस के अंदर आने दिया जायेगा या नहीं? कहीं आज बाहर से ही ना विदाई हो जाये.. कारण बस यही कि मेरे पास पिस्तौल नहीं है..असल में बात यह है कि कुछ दिन पहले मेरे ऑफिस में मुख्य द्वार पर एक बोर्ड लगा दिया गया है जिस पर कुछ आपत्तिजनक...

Sunday, December 28, 2008

क्यों अक्सर भाई बहनों के लिये लड़ते हैं?

कल भी किसी आम दिन कि तरह ही दीदी को फोन किया और बात चलते-चलते बहुत लम्बी खींच गई मगर फिर भी फोन रखने का मन नहीं कर रहा था.. आखिर बहुत दिनों बाद दीदी के साथ पुराने दिनों को याद करते हुये वर्तमान को जी रहे थे.. अक्सर दीदी...

Friday, December 26, 2008

हर्ष मनाऊं या शोक?

आज का दिन कुछ ऐसा है जिसने मुझे असमंजस में डाल रखा है कि मैं आज हर्ष मनाऊँ या शोक? मेरे पास दोनों ही के लिए उम्दा कारण भी हैं.. हर्ष मनाने का कारण आज मेरे पापाजी का जन्मदिन है और शोक का कारण आज के ही दिन तीन साल पहले आया सुनामी है जिसने लाखों लोगों कि इहलीला समाप्त कर दी थी और लाखों को पूरी तरह से उजाड़...

Thursday, December 25, 2008

मेरे नये i-Pod कि खूबियां जो किसी को भी चकाचौंध कर डाले

कुछ दिन पहले मेरी एक मित्र अपने किसी काम से अमेरिका गई थी, वहां जाकर उसने मुझसे पूछा कि कुछ चाहिये क्या और मैंने उससे आई-पॉड मंगवा लिया.. मैंने उसे बस अपना बजट बताया और बाकी उसकी पसंद पर छोड़ दिया.. मुझे ज्यादा मेमोरी कि...

Saturday, December 20, 2008

हमारे भाईज़ान पर एक गज़ल

आप आये तो लगा जैसे,गुलशन-ए-बहार आया..जैसे बजते हुये किसी मीठी धुन में,लेकर कोई 'गिटार' आया..छम-छम सी चलती हुई कोई लड़की,के हाथों में जैसे बिजली का तार आया..खामोशियों के अफ़साने जहां बजते हों,उस बस्ती को जैसे कोई उजाड़ आया..मुरझाये...

Friday, December 19, 2008

कबाड़ी के कबाड़ से निकला यादों का पुलिंदा

अभी कुछ दिन पहले कबाड़खाना पर कुछ गीतों का दौर चल रहा था.. जिसमें सबसे पहले "वो गाये तो आफ़त लाये है सुर ताल में लेवे जान निकाल" सुनने को मिला.. उसमें आये कुछ कमेंट के बाद सिद्धेश्वर जी ने "दिल सख़्त क़यामत पत्थर सा और बातें नर्म रसीली सी" नामक पोस्ट दे मारी.. मुझे भी कुछ जोश आया और मैंने भी एक पोस्ट गीतों...

Thursday, December 18, 2008

सौ में सौ से ज्यादा नंबर कैसे लायें?

मैंने कुछ दिन पहले अपने कालेज के दिनों का एक पोस्ट लिखा था कि कैसे साफ्टवेयर इंजिनियरिंग पेपर हमे परेशान कर रखा था.. खैर पहला इंटरनल निकल चुका था और उसमें हम सभी फेल हो चुके थे.. अब सुनते हैं आगे का किस्सा..जब हमने अपनी-अपनी...

Wednesday, December 17, 2008

पिया बाज प्याला, पीया जाये ना

मेरे मनपसंद गीतों में से एक..पिया बाज प्याला,पीया जाये ना..पिया बाज यकतिल,जिया जाए ना..नहीं इश्क जिसे वो,बड़ा ख़ूर है..कभी उससे मिल,बैसा जाए ना..कुतुबशा ना दे मुझ,दीवाने को पंद..दीवाने को कुछ पंद,दिया जाए ना.. Get this widget | Track details | eSnips Social DNA मुजफ्फर अली द्वारा कम्पोज...

Sunday, December 14, 2008

इंद्रियां अभी जिंदा है मेरी

आज सबसे पहले मैं ये बता देता हूं कि आज के इस पोस्ट में मैं जिस हिंग्लिश में बात करता हूं वही भाषा आपको पढ़ने को मिलेगी.. शुद्ध हिंदी पढ़ने की चाह वाले इसे ना पढ़ें..अक्सर मैं अपने दोस्तों को कहता था कि खाना मेरे लिये कभी फर्स्ट प्रायौरिटी नहीं है, यह हमेशा मेरे लिये सेकेण्ड ही रहेगा.. वो सभी यही समझने...

Thursday, December 11, 2008

हमारे अठारह, तेरे कितने?

पढ़ाई करो बस एक रात और उसमें भी चाहो कि नंबर आये अव्वल नंबर वाला.. ये कुछ इंसानों के लिये तो संभव है मगर मुझ जैसे साधारण प्राणियों के लिये असंभव.. मगर फिर भी ये आदत पूरे कालेज जीवन में नहीं बदली.. एक बार मैंने जोड़ा कि पूरे...

Wednesday, December 10, 2008

तेरी भाभी ने मुझे सॉरी बोला

"क्या कर रहा है भाई?" दोपहर के खाने के बाद मैंने सेमटाईम पर पिंग करते हुये पूछा.. सेमटाईम हमारे कार्यालय में इंट्रानेट पर आपस में चैट करने के लिये प्रयोग में लाया जाता है.."काम.. काम.. और बस काम.. और क्या कर सकता हूं?""कित्ता काम करेगा भाई? चल छोड़ ये सब, पता है? कल तेरी भाभी मुझे सॉरी बोली.. :)""अच्छा!!""हां,...

Monday, December 08, 2008

जनता का ध्यान बटाने कि एक और कोशिश

नोट - मैंने यह पोस्ट तेल के दाम घटाये जाने से एक दिन पहले लिखा था, जिसे समयाभाव में समय पर पोस्ट नहीं कर सका था..सबसे पहले मैं बता देना चाहता हूं कि मैं ना तो कोई आर्थिक विशेशज्ञ हूं और ना ही अर्थ व्यवस्था का बहुत बड़ा जानकार.....

Saturday, December 06, 2008

क्या होगा इस देश का?

इस सप्ताह काम कर करके दिमाग खराब हो गया है.. हर दिन कम से कम 11 बजे घर पहूंचना चाहे जो भी जतन लगा लो.. अभी भी ऑफिस में ही हूं, पता नहीं कब घर जाऊंगा.. या जाऊंगा भी या नहीं.. मेरे जैसा योग्य युवक इस साधारण बग फिक्सिंग जैसे कार्यों में पहंसा हुआ है अब आप ही कहीये ऐसे में इस देश का क्या होगा? :Dये लो,...

Friday, December 05, 2008

वृथा मत लो भारत का नाम

वृथा मत लो भारत का नाम।मानचित्र में जो मिलता है, नहीं देश भारत है,भू पर नहीं, मनों में ही, बस, कहीं शेष भारत है।भारत एक स्वप्न भू को ऊपर ले जानेवाला,भारत एक विचार, स्वर्ग को भू पर लानेवाला।भारत एक भाव, जिसको पाकर मनुष्य जगता है,भारत एक जलज, जिस पर जल का न दाग लगता है।भारत है संज्ञा विराग की, उज्ज्वल...

Wednesday, December 03, 2008

हमारे पूर्वज नहीं हम बंदर हैं और नचाने वाला यह सिस्टम

आज कल जिसे देखो वही सिस्टम को गालियां दे रहा है.. मैं भी हूं उसी जमात में.. नेताओं को गाली, सिस्टम को गाली, पाकिस्तान को गाली.. खैर ये सब बातें बाद में करता हूं पहले आपको एक कहानी सुनाता हूं.. ये कहानी मैनेजमेंट कालेजों में बहुत प्रसिद्ध है..एक बार 10 बंदर जंगल से पकड़े गये.. दसों को एक ही पिंजरे में...