Wednesday, August 29, 2007

स्वप्न की चाह

ये कविता मैंने बहुत पहले लिखी थी और मुझे ये किसी बेकार तुकबंदी से ज्यादा कुछ नहीं लगी थी इसलिये अपने ब्लौग पर इसे नहीं डाला था। वैसे ये मुझे आज भी बहुत ज्यादा पसंद नहीं है फिर भी मैंने सोचा की अगर मैं अपनी अच्छी चीजें यहां...

Thursday, August 23, 2007

भाषा का ज्ञान और भाषा की समझ

मेरी समझ में भाषा का ज्ञान और भाषा की समझ दोनों में बहुत अंतर है। मेरी मातृभाषा हिंदी है जिसे मैं बचपन से बोलता आया हूं और मुझे इस भाषा से बहुत प्रेम भी है। मैं कुछ और भाषा भी समझ और बोल लेता हूं पर मेरी समझ में वो बस हिंदी...

Saturday, August 18, 2007

एक कहानी बचपन की

मेरे पापाजी को पैर दबवाने का बहुत शौक है, खासकर खाना खाने के बाद। ये हम बच्चों कि बचपन से ही ड्युटी रहती थी की खाना खाने के बाद पापाजी का पैर दबाना है। और हर बच्चों की तरह हम भी बचते रहते थे की खाना खाने के बाद पापाजी के...

Friday, August 17, 2007

कुछ खूबसूरत लम्हे मेरे विद्यार्थी जीवन के

यहाँ पेश है मेरे विद्यार्थी जीवन के कुछ खूबसूरत लम्हों की तस्वीर, जिसे मैं अपने भाग-दौड़ कि जिन्दगी में कहीं पीछे छुटा हुआ पाता हूं। कभी-कभी जी में आता है कि इसे अपने जीवन से फ़िर से मांग लूँ और अगर मांगने से ना मिले तो छीन...

Monday, August 06, 2007

यह कदम्ब का पेड़ / सुभद्राकुमारी चौहान

मैं आज जब इंटरनेट की खिड़की से झांक रहा था तब अनायाश ही ये कविता हाथ लग गयी, जिसे मैं अपने बाल भारती नाम के पुस्तक में पढा था। ठीक से याद तो नहीं है पर शायद कक्षा एक या दो में। खैर जो भी हो, मुझे ये कविता बचपन से ही बहुत...

Saturday, August 04, 2007

पाब्लो नेरूदा

आज बस यूं ही इंटरनेट पर घुमते हुये मुझे पाब्लो नेरूदा से संबंधित कुछ जानकारी मिली जिसने मुझे काफ़ी प्रभावित किया। लिजिये मैं वह सारी चीजें आपके सामने अपनी भाषा में रखता हूं। उनकी लिखी कविता का हिंदी और अंग्रेजी रूपांतरण,...